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बेरोजगारी की वजह मोदी सरकार की नाकामी : राहुल गांधी

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अवधेश कुमार | 16 जनवरी 2026

नई दिल्ली। राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि नए-नए नारे और जुमले तो बनते, बदलते गए लेकिन युवाओं की ज़िंदगी नहीं बदली। अगर आप बेरोज़गार हैं, नौकरी तलाश रहे हैं या तलाश कर-कर हताश हो गए हैं – खुद को दोष मत दीजिए – यह आपकी गलती नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि यह मोदी सरकार की नाकामी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने देश के युवाओं को Right to Apprenticeship Act का वादा किया था – 1 लाख/वर्ष के स्टाइपेंड की गारंटी दी थी। ये आपका अधिकार होता जिसे पूरा करने के लिए सरकार बाध्य होती। रचनात्मक दिवालियापन से तंग मोदी सरकार ने सोचा कि क्यों न इसी की नकल कर ली जाए। देश के युवाओं से कहा गया था कि 1 करोड़ इंटर्नशिप दी जाएगी लेकिन 30 नवंबर 2025 तक सिर्फ 2,053 युवाओं ने अपनी इंटर्नशिप पूरी की। एक साल ₹10,800 करोड़ का बजट रखा लेकिन खर्च हुआ सिर्फ़ ₹73 करोड़ – 1% से भी कम। बाकी 99% पैसा क्यों नहीं खर्च हुआ?

उन्होंने बताया कि एक साल से ज़्यादा काम कराया गया – ₹5,000 महीने पर। और अंत में? सिर्फ़ 95 युवाओं को नौकरी का ऑफर मिला। क्या “स्किल डेवलपमेंट” के नाम पर युवाओं से सिर्फ़ सस्ती मज़दूरी करवाई गई? यह सरासर मोदी सरकार की नाम है। उन्होंने एक और उदाहरण का हवाला देखते हुए कहा कि.. Skill India – PM कौशल विकास योजना को मोदी जी ने बहुत गाजे बाजे के साथ शुरू किया। कहा कि हर प्रमाणित युवा को ₹500 डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से दिए जाएंगे। ये सभी मोदी सरकार की नाकामी है।

लेकिन CAG ने सच उजागर कर दिया – 95% मामलों में बैंक डिटेल्स खाली या ज़ीरो थीं। यानि पैसा था, योजना थी – लेकिन पैसा युवाओं तक पहुँचा ही नहीं। ये योजना नहीं, भयंकर घोटाले का हथियार था। ये युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और बहुत बड़ा भ्रष्टाचार था। और यह भी मोदी सरकार की नाकामी है। भारत के हुनरमंद और मेहनती युवाओं, आप इससे बेहतर के हक़दार हैं। जुमलों और भ्रष्टाचार नहीं – पक्की नौकरी के हकदार हैं जो आपको नहीं मिल रही है। और यह सरासर मोदी सरकार की नाकामी है।

CAG ऑडिट रिपोर्ट ने केंद्र सरकार की दो प्रमुख योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जहां लाखों लाभार्थियों के बैंक खातों में “1111111111” जैसे फर्जी नंबर दर्ज पाए गए, कई प्रशिक्षण केंद्र बंद मिले और एक जैसी तस्वीरों से फर्जीवाड़े के संकेत मिले। रिपोर्ट के मुताबिक, योजना के तहत शामिल 95.9 लाख प्रतिभागियों में से करीब 94.5 प्रतिशत के पास वैध बैंक खाता विवरण ही दर्ज नहीं था। वहीं, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में भी लापरवाही सामने आई है, जहां नवंबर तक बजट का सिर्फ 4 प्रतिशत ही खर्च हो सका और अधिकांश धन बिना उपयोग के पड़ा रहा। इन खुलासों ने सरकारी योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता और ज़मीनी क्रियान्वयन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि हमारा विज़न साफ़ है – युवाओं को AI, ड्रोन, बैटरी टेक्नोलॉजी, EVs जैसे उभरते क्षेत्रों में स्किल करना और Production + Participation मॉडल से उन्हें नौकरी देना जहाँ युवा सिर्फ़ दर्शक नहीं, भागीदार हों। और सबसे ज़रूरी – देश में मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां वापस लाना, ताकि भारत उद्यमी देश बने, युवा जिसकी तरक्की में भागीदार बने।

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