राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 19 जुलाई 2026
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आमरण अनशन और NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच रविवार को मुंबई में भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे, विधायक आदित्य ठाकरे और पार्टी कार्यकर्ताओं ने दादर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज मैदान (शिवाजी पार्क) में वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी नेताओं ने लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की और वांगचुक के आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिवसेना (यूबीटी) कार्यकर्ता शामिल हुए। नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग उठाई। सभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि यदि कोई सरकार जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है तो उसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष शुरू होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों की चिंताओं को सुनने के बजाय उन्हें दबाने का प्रयास कर रही है।
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश के लाखों छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज़ सुनने के बजाय आंदोलन करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि युवा अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं तो यह सरकार के लिए आत्ममंथन का विषय होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को आंदोलनकारियों के साथ संवाद करना चाहिए। ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार असहमति की आवाज़ों को दबाकर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है। उनके अनुसार, जनता के सवालों का जवाब पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि बातचीत और जवाबदेही से दिया जाना चाहिए।
आदित्य ठाकरे ने भी प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं की चिंताओं को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में भरोसा कायम रखना सरकार की जिम्मेदारी है और यदि लाखों छात्र व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं तो उन सवालों का समाधान होना चाहिए।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के समर्थन में आमरण अनशन पर हैं। आंदोलन का मुख्य मुद्दा NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। अनशन के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई थी, जहां उनका इलाज जारी है। हालांकि वांगचुक ने अस्पताल में भी अपना अनशन जारी रखा है।
इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की उस अंतरिम याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने सरकार और अस्पताल प्रशासन से तीन दिन के भीतर स्वास्थ्य संबंधी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और पहले दिए गए न्यायालय के निर्देशों के आधार पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
वांगचुक के समर्थन में देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन लगातार बढ़ रहे हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और कई अन्य शहरों में छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने रैलियां और प्रदर्शन आयोजित किए हैं। केरल के विपक्ष के नेता पिनराई विजयन, बीजू जनता दल अध्यक्ष नवीन पटनायक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी सरकार से छात्रों के साथ संवाद शुरू करने और संसद में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग कर चुके हैं।
उधर, संसद के मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में भी विपक्ष ने NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और सोनम वांगचुक के आंदोलन का मुद्दा उठाया। विपक्ष का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, छात्रों के भविष्य और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना होगा।
मुंबई में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में हुआ यह प्रदर्शन इसी व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें विपक्ष केंद्र सरकार को शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के भविष्य और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर लगातार घेरने की रणनीति अपना रहा है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि सभी आवश्यक कदम कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप उठाए जा रहे हैं तथा व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।




