अखलाक अहमद | उदयपुर 26 दिसंबर 2025
उदयपुर से आई यह खबर सिर्फ एक अपराध की सूचना नहीं है, यह उस भरोसे के टूटने की कहानी है, जिसे एक महिला अपने कार्यस्थल, अपने सहकर्मियों और अपने आसपास के लोगों पर करती है। राजस्थान के उदयपुर में एक आईटी कंपनी की महिला मैनेजर के साथ चलती कार में जो हुआ, उसने समाज को फिर आईना दिखा दिया है—कि पद, पैसा और ताकत अगर इंसानियत से खाली हो जाए, तो वह कितना भयावह रूप ले सकती है।
पीड़िता के अनुसार, वह अपने ही ऑफिस से जुड़े लोगों के साथ एक पार्टी के बाद घर लौट रही थी। आरोप है कि इसी दौरान कंपनी के CEO, एक महिला सीनियर अधिकारी और उसके पति ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। यह घटना सिर्फ शारीरिक हिंसा नहीं थी, मानसिक, भावनात्मक और पेशेवर स्तर पर एक महिला को पूरी तरह तोड़ देने वाली वारदात थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और जांच जारी है।
इस मामले को और भी विचलित करने वाला यह तथ्य बनाता है कि आरोपी वही लोग बताए जा रहे हैं, जिन पर पीड़िता को सबसे ज़्यादा भरोसा होना चाहिए था। एक CEO—जिसे नेतृत्व, सुरक्षा और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है—अगर ऐसे आरोपों में गिरफ्तार होता है, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं रहता, बल्कि पूरे सिस्टम पर खड़ा हो जाता है।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि महिलाओं की असुरक्षा केवल सुनसान गलियों या अजनबी चेहरों से नहीं आती। कई बार खतरा वहीं होता है, जहां महिला खुद को सुरक्षित मानती है—ऑफिस, टीम, बॉस और सहकर्मी। यही वजह है कि यह मामला समाज के हर उस आदमी को झकझोरता है, जो मानता है कि “हमारे आसपास ऐसा नहीं होता।”
पीड़िता का सामने आना आसान नहीं रहा होगा। डर, बदनामी, करियर के खत्म हो जाने का खतरा—इन सबके बावजूद अगर एक महिला हिम्मत जुटाकर सच कहती है, तो यह उसकी ताकत है और समाज की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसके साथ खड़ा हो। कानून का काम सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि त्वरित, निष्पक्ष और संवेदनशील न्याय सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
यह मामला एक चेतावनी है—कार्यालय केवल काम करने की जगह नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा का भी दायरा होना चाहिए। जो लोग अपने पद और रसूख का इस्तेमाल महिलाओं को कुचलने के लिए करते हैं, उनके लिए समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
आज यह खबर उदयपुर की है, कल कहीं और की हो सकती है। सवाल यही है कि क्या हम इसे एक और “ब्रेकिंग न्यूज़” बनाकर भूल जाएंगे, या फिर यह तय करेंगे कि किसी भी महिला के साथ हुआ अन्याय पूरे समाज का मामला है।
न्याय सिर्फ सजा का नाम नहीं—न्याय भरोसे को लौटाने की कोशिश भी है।




