अरिंदम बनर्जी | कोलकाता | 13 जनवरी 2026
पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। हालात को गंभीरता से लेते हुए केंद्र ने एक नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (National Joint Outbreak Response Team) को राज्य में तैनात किया है, ताकि संक्रमण को समय रहते रोका जा सके और स्थिति नियंत्रण में रहे।
ये दोनों संदिग्ध मामले रविवार को AIIMS कल्याणी स्थित ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी में पहचाने गए। इसके बाद स्वास्थ्य एजेंसियों ने तुरंत अलर्ट जारी किया और केंद्र व राज्य स्तर पर समन्वय तेज कर दिया गया।
केंद्र की टीम क्यों भेजी गई?
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि टीम का मकसद राज्य सरकार की मदद करना, संक्रमण की जांच, निगरानी, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और प्रभावी कंटेनमेंट रणनीति लागू करना है। निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा संक्रमण माना जाता है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर
राज्य के स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध मरीजों के संपर्क में आए लोगों की पहचान की जाए, अस्पतालों में आइसोलेशन और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन हो और किसी भी नए लक्षण की तुरंत रिपोर्ट की जाए। अस्पतालों को जरूरी दवाइयों, PPE किट और मेडिकल स्टाफ की तैयारी रखने को कहा गया है।
निपाह वायरस कितना खतरनाक?
निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक वायरस है, जो इंसानों में गंभीर बुखार, सांस की दिक्कत और दिमागी सूजन (एन्सेफलाइटिस) का कारण बन सकता है। इसका संक्रमण तेजी से फैल सकता है, इसलिए शुरुआती पहचान और समय पर रोकथाम बेहद जरूरी मानी जाती है।
लोगों से अपील
स्वास्थ्य अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क रहें। बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अफवाहों से बचें। स्थिति पर करीबी निगरानी रखी जा रही है और केंद्र व राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि निपाह वायरस का संक्रमण आगे न फैल पाए।




