Home » International » ट्रंप की धमकी, होर्मुज खोलो वरना कब्रिस्तान बनने को तैयार रहो : ईरान झुकने को तैयार नहीं

ट्रंप की धमकी, होर्मुज खोलो वरना कब्रिस्तान बनने को तैयार रहो : ईरान झुकने को तैयार नहीं

दुनिया | एजेंसी / ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/तेहरान | 7 मई 2026

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर बेहद सख्त चेतावनी दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपनी रणनीति नहीं बदली और अमेरिकी शर्तों को नहीं माना, तो उसे “कब्रिस्तान बनने” के लिए तैयार रहना चाहिए। ट्रंप की इस तीखी चेतावनी के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। दुनिया की नजरें फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हैं, जिसे वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। इस रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई होती है।हालांकि अमेरिकी धमकी के बावजूद ईरान अपने रुख पर कायम है। तेहरान की ओर से संकेत दिए गए हैं कि वह किसी भी धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह भी दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित “वन-पेज डील” को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच सकती है। माना जा रहा है कि इस समझौते का उद्देश्य तनाव को कम करना और संभावित सैन्य टकराव को रोकना है। हालांकि दोनों देशों की ओर से अभी तक किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की सख्त भाषा रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है, ताकि ईरान को बातचीत की मेज पर लाया जा सके। वहीं दूसरी ओर ईरान भी क्षेत्रीय ताकत के रूप में अपनी स्थिति कमजोर नहीं दिखाना चाहता।

पिछले कुछ दिनों में फारस की खाड़ी और होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। अमेरिकी नौसेना की तैनाती और ईरान की मिसाइल तैयारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी प्रकार का बड़ा सैन्य टकराव होता है, तो उसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत समेत कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं। दुनिया यह देखने का इंतजार कर रही है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है या पश्चिम एशिया एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments