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ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारतीय सेना का बड़ा फोकस: अंडरग्राउंड बंकर और एयर डिफेंस सिस्टम पर जोर

राष्ट्रीय | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 मई 2026

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक वर्ष पूरे होने के बाद भारतीय सेना ने अपनी रणनीतिक तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सेना अब सीमावर्ती इलाकों में अंडरग्राउंड बंकर, एयर डिफेंस सिस्टम और अत्याधुनिक सुरक्षा ढांचे पर विशेष फोकस कर रही है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, पिछले एक साल में सेना ने युद्ध जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।

जानकारी के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आई चुनौतियों के बाद सेना ने यह महसूस किया कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि मिसाइल, ड्रोन और एयर स्ट्राइक जैसे खतरों से भी एक साथ निपटना होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमिगत बंकरों के निर्माण और एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में सैनिकों और सैन्य उपकरणों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुकी है। अंडरग्राउंड बंकर न केवल सैनिकों को हवाई हमलों से सुरक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि युद्ध के दौरान कमांड और कंट्रोल सिस्टम को भी सुरक्षित बनाए रखने में मदद करते हैं। सेना अब ऐसे बंकर विकसित कर रही है जो लंबी अवधि तक संचालन योग्य रहें और जिनमें आधुनिक संचार सुविधाएं भी मौजूद हों।

इसके साथ ही भारतीय सेना ने एयर डिफेंस क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में नए रडार सिस्टम, मिसाइल इंटरसेप्टर और ड्रोन रोधी तकनीकों की तैनाती की जा रही है। माना जा रहा है कि भविष्य में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम बेहद अहम भूमिका निभाएगा।

सूत्रों के अनुसार, सेना ने कई संवेदनशील क्षेत्रों में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की गति भी तेज कर दी है। सीमा के पास सड़कों, सुरंगों और सैन्य लॉजिस्टिक नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर सैनिकों और हथियारों की तेजी से तैनाती की जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों ने दुनिया की सेनाओं को यह सिखाया है कि आधुनिक युद्ध में तकनीक, सुरक्षा ढांचा और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। भारतीय सेना भी इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है।

रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की प्राथमिकता केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य ढांचे को अधिक मजबूत बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

भारतीय सेना के इस नए फोकस को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में अंडरग्राउंड सैन्य ढांचे और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम भारत की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

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