कीव (यूक्रेन), 23 अक्टूबर 2025
रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव और देश के अन्य प्रमुख शहरों पर मिसाइलों और ड्रोन की एक अभूतपूर्व और भीषण श्रृंखला दागकर पूरे देश को दहला दिया। ये हमले इतने व्यापक थे कि कई महत्वपूर्ण नागरिक ठिकाने ध्वस्त हो गए, जिनमें दर्जनों आम नागरिक मारे गए हैं। मरने वालों में कम से कम चार मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी मौत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को हिलाकर रख दिया है। दुखद बात यह है कि बर्बादी का यह भयावह मंजर ठीक उस समय सामने आया, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली उच्च-स्तरीय शांति वार्ता को अचानक स्थगित कर दिया गया था। इस हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मॉस्को फिलहाल किसी भी तरह के युद्धविराम या सार्थक कूटनीति की दिशा में झुकाव नहीं दिखा रहा है।
मौत, मातम और बुनियादी ढाँचे पर सीधा वार
यूक्रेन के आंतरिक मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, बचाव दलों ने देर रात तक भी मलबे में दबे हुए कई शवों को निकालने का काम जारी रखा। देश के कई बड़े शहर, जिनमें कीव, ड्निप्रो और खारकीव शामिल हैं, सीधे रूसी हमलों की चपेट में आए। इन हमलों में न केवल आवासीय इमारतें और स्कूल बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए, बल्कि कई महत्वपूर्ण बिजली संयंत्रों को भी निशाना बनाया गया, जिससे लाखों नागरिकों के जीवन पर सीधा असर पड़ा है। स्थानीय सैन्य अधिकारियों ने बताया कि रूस ने एक साथ 400 से अधिक ड्रोन और 30 मिसाइलें दागी थीं। यूक्रेनी वायु रक्षा प्रणालियों ने इनमें से अधिकांश हमलावर हथियारों को नष्ट करने में सफलता हासिल की, लेकिन जो मिसाइलें और ड्रोन बच गए, उन्होंने सीधे घनी आबादी वाले नागरिक इलाकों को निशाना बनाया, जिसके परिणामस्वरूप निर्दोष लोगों की जान गई है और भीषण तबाही मची है। यह क्रूर हमला रूस की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें वह बुनियादी नागरिक ढाँचों पर लगातार दबाव बनाकर यूक्रेनी नागरिकों का मनोबल तोड़ना चाहता है।
युद्ध और राजनीति का टकराव: कूटनीतिक उम्मीदों पर गहरा आघात
रूस द्वारा किए गए इस विनाशकारी हमले से कुछ ही घंटे पहले, वैश्विक शांति की उम्मीदों को एक बड़ा झटका लगा था। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच होने वाली महत्वपूर्ण शांति-वार्ता को “अनिश्चित काल के लिए” टाल दिया गया था। यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही थी क्योंकि इससे रूस-यूक्रेन संघर्ष में कुछ नरमी आने और तनाव कम होने की उम्मीद जगी थी। हालांकि, वार्ता के रद्द होने के तुरंत बाद हुए इस क्रूर हमले ने माहौल को और भी अधिक तनावपूर्ण और निराशाजनक बना दिया है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस हमले पर कठोर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि, “जब तक हमारे मासूम बच्चों पर बम गिर रहे हैं, तब तक कोई भी शांति वार्ता न तो नैतिक हो सकती है और न ही संभव। रूस का वर्तमान नेतृत्व केवल बल और क्रूरता की भाषा समझता है, कूटनीति की भाषा नहीं।” उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि यूक्रेन अब किसी भी ऐसे कूटनीतिक प्रयास पर भरोसा नहीं कर रहा है, जो ज़मीन पर हिंसा को तुरंत न रोक सके।
पश्चिमी जगत में आक्रोश और सख्त प्रतिक्रिया की तैयारी
इस भीषण हमले की अमेरिका, यूरोपीय संघ (ईयू) और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) सहित पूरे वैश्विक समुदाय ने कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने एक आपातकालीन बयान जारी करते हुए कहा कि “बच्चों की हत्या किसी भी युद्ध को वैध नहीं ठहरा सकती,” और इस कृत्य की तत्काल अंतरराष्ट्रीय जाँच की मांग की।
व्हाइट हाउस ने इस हमले को “शांति प्रक्रिया को पटरी से उतारने की सोची-समझी कोशिश” बताया, जो यह दर्शाता है कि पश्चिमी शक्तियां रूस के इरादों को लेकर अब पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी हैं। इस हमले और ट्रम्प-पुतिन वार्ता के रद्द होने की घटनाओं का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि ये दोनों घटनाएँ मिलकर अंतर्राष्ट्रीय जनमत को रूस के खिलाफ और अधिक कठोर बना सकती हैं।
इस कठोरता के परिणामस्वरूप, आने वाले दिनों में पश्चिमी देश यूक्रेन को और भी उन्नत रक्षा हथियार और सैन्य सहायता देने पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं, जिससे यह संघर्ष एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच सकता है। कुल मिलाकर, यह हमला मॉस्को का एक स्पष्ट संदेश है कि वह अपनी सैन्य आक्रामकता को जारी रखने के लिए तैयार है, भले ही इसकी कीमत निर्दोष नागरिक जीवन ही क्यों न हो।




