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रूसी तेल खरीद पर भड़के ट्रंप, भारत पर ‘कड़े टैरिफ’ लगाने की दी चेतावनी

वाशिंगटन, 5 अगस्त 2025

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बार फिर भारत के खिलाफ तीखा रुख अपनाते हुए ऐलान किया है कि वह रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर “कड़ा और भारी टैरिफ” लगाएंगे। उन्होंने सोशल मीडिया मंच Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है और फिर उसका एक बड़ा हिस्सा ओपन मार्केट में बेचकर भारी मुनाफा कमा रहा है, जबकि रूस की युद्ध मशीन यूक्रेन में लोगों की जान ले रही है।

ट्रंप ने सीधे तौर पर भारत की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, “उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि यूक्रेन में कितने लोग मारे जा रहे हैं। वे रूस से तेल खरीदते हैं और फिर उसे वैश्विक बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर लाभ उठा रहे हैं।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह “टैरिफ वृद्धि” किस रूप में लागू होगी या इसका दायरा कितना व्यापक होगा।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने की रणनीति के तहत रूस से तेल की खरीद को प्राथमिकता दी है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत और रूस के बीच कच्चे तेल का व्यापार लगातार बढ़ रहा है। इस कदम से अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश असहज दिखाई दे रहे हैं, लेकिन भारत इसे “राष्ट्रीय ऊर्जा हितों” और “रणनीतिक स्वायत्तता” का हिस्सा मानता है।

भारत सरकार की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनयिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप यदि दोबारा राष्ट्रपति चुने जाते हैं, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव की नई लहर देखने को मिल सकती है।

विश्लेषकों का यह भी मानना है कि ट्रंप का यह बयान न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भूराजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है, खासकर जब रूस-यूक्रेन युद्ध लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ है और वैश्विक ऊर्जा व्यापार उसके केंद्र में है।

इस घटनाक्रम ने आने वाले अमेरिकी चुनावों और भारत-अमेरिका रिश्तों के भविष्य को लेकर अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें भारत सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि व्यापारिक हितों और रणनीतिक साझेदारी के बीच वह किस रास्ते को चुनती है।

 

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