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अमेरिका-भारत संबंधों पर सलाह देने वाले शीर्ष अमेरिकी विशेषज्ञ गुप्त दस्तावेज़ मामले में गिरफ्तार — वाशिंगटन में खलबली

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वाशिंगटन डीसी 16 अक्टूबर 2025

अमेरिका और भारत के रणनीतिक संबंधों पर लंबे समय से सलाह देने वाले एक वरिष्ठ अमेरिकी विशेषज्ञ को गुप्त दस्तावेज़ (Classified Documents) के लीक से जुड़े गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। इस गिरफ्तारी ने वाशिंगटन के नीति-निर्माण और विदेश मामलों के गलियारों में सनसनी फैला दी है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति का नाम अभी औपचारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक वे पूर्व में कई अमेरिकी प्रशासन — विशेषकर ओबामा, ट्रम्प और बाइडन सरकारों — को दक्षिण एशिया नीति पर सलाह देते रहे हैं।

उन पर आरोप है कि उन्होंने अत्यंत गोपनीय राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेज़ों को बिना अनुमति अपने निजी कब्जे में रखा और कुछ सूचनाओं को साझा भी किया।

एफबीआई की छापेमारी और बरामदगी

एफबीआई (FBI) ने विशेषज्ञ के वॉशिंगटन स्थित घर और कार्यालय पर छापा मारा, जहां से कई संवेदनशील फाइलें, लैपटॉप और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि कुछ दस्तावेज़ भारत-अमेरिका रणनीतिक वार्ताओं, रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक नीति से जुड़े हैं।

एफबीआई अधिकारियों के अनुसार, “यह मामला केवल दस्तावेज़ रखने का नहीं, बल्कि संभावित राष्ट्रीय सुरक्षा उल्लंघन (National Security Breach) का है।”

हालांकि जांच एजेंसियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्या भारत या किसी तीसरे देश से सूचना साझा की गई थी या नहीं।

अमेरिकी प्रशासन की प्रतिक्रिया

व्हाइट हाउस ने इस गिरफ्तारी पर टिप्पणी करने से इनकार किया है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) के एक अधिकारी ने कहा कि,

“हम राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी किसी भी लापरवाही को बहुत गंभीरता से लेते हैं। जांच निष्पक्ष और सख्त होगी।”

वहीं, विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों पर “अस्थायी छाया” डाल सकता है।

विशेषज्ञ की पहचान और पृष्ठभूमि

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार विशेषज्ञ अमेरिकी थिंक टैंक में वरिष्ठ फेलो के रूप में कार्यरत थे और भारत, चीन और दक्षिण एशिया नीति पर कई रिपोर्टें लिख चुके हैं। वे कई बार अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई में बतौर गवाह भी पेश हो चुके हैं।

संभावित प्रभाव

विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से अमेरिका के गोपनीय सूचना प्रबंधन और थिंक टैंक-सरकार के रिश्तों पर नए सिरे से बहस छिड़ सकती है। अमेरिकी रक्षा और विदेश विभाग ने सभी संवेदनशील दस्तावेज़ों की आंतरिक समीक्षा (Internal Review) शुरू कर दी है।

कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अमेरिकी नीति तंत्र के भीतर गोपनीयता और जवाबदेही के ताने-बाने पर गहरी चोट है — जो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहेगा।

 

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