एबीसी नेशनल न्यूज 25 जनवरी 2026
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के लोगों के नाम बंगाल की वोटर लिस्ट में जोड़ दिए गए हैं। इस खुलासे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
TMC ने एक चौंकाने वाला उदाहरण सामने रखा है। उज्ज्वला अप्पा बुरुंगले नाम की महिला, जो महाराष्ट्र के नासिक ज़िला परिषद की बीजेपी उम्मीदवार रह चुकी हैं, उनका नाम अब पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में भी पाया गया है। खुद उज्ज्वला ने स्वीकार किया है कि वह महाराष्ट्र में बीजेपी की उम्मीदवार थीं। इसके बावजूद उनका नाम बंगाल की मतदाता सूची में दर्ज होना कई सवाल खड़े करता है।
TMC का आरोप है कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है। पार्टी का कहना है कि बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों के लोगों को भी बंगाल का वोटर बना दिया गया है। इन लोगों का बंगाल से कोई स्थायी पता नहीं है और न ही वे यहां रहते हैं। फिर भी उनके नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल हो गए, यह एक बड़ा रहस्य बना हुआ है।
TMC नेताओं का कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने खुद घर-घर जाकर जांच की है। जिन इलाकों में ऐसे संदिग्ध वोटरों के नाम दर्ज हैं, वहां जाकर लोगों से पूछताछ की गई। जांच में पता चला कि कई नामों के पीछे ऐसे लोग हैं जो कभी बंगाल में रहे ही नहीं। कुछ मामलों में जिन पते पर वोटर दर्ज हैं, वहां रहने वाले लोगों ने साफ कहा कि वे ऐसे किसी व्यक्ति को जानते तक नहीं।
इन तमाम मामलों को सामने लाने के बाद TMC ने चुनाव आयोग के पास “फॉर्म-7” जमा किया है, ताकि इन संदिग्ध वोटरों के नाम मतदाता सूची से काटे जा सकें। पार्टी का कहना है कि यह पूरी कवायद चुनावी फायदे के लिए की जा रही है और इसके जरिए बंगाल के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।
TMC नेताओं ने आरोप लगाया कि यह एक सुनियोजित साजिश है, जिसके तहत दूसरे राज्यों के लोगों को बंगाल का वोटर बनाकर वोट बैंक तैयार किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह सीधे तौर पर लोकतंत्र के साथ धोखा है और “एक व्यक्ति, एक वोट” के सिद्धांत का खुला उल्लंघन है।
इस पूरे मामले में चुनाव आयोग की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। TMC का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद चुनाव आयोग ने अब तक उन करीब 1.5 करोड़ वोटरों की सूची नहीं दी है, जिन्हें नोटिस भेजे जाने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 72 घंटे का समय दिया था, लेकिन वह समय भी खत्म हो चुका है और अब तक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है।
TMC का आरोप है कि अगर चुनाव आयोग के पास कोई छिपाने लायक बात नहीं है, तो फिर वह इतनी बड़ी सूची देने में देरी क्यों कर रहा है। पार्टी नेताओं ने कहा कि यह देरी इस बात की ओर इशारा करती है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर है।
राज्य में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। TMC इसे बंगाल के मतदाताओं के हक पर हमला बता रही है, वहीं विपक्ष पर वोट चोरी की साजिश रचने का आरोप लगा रही है। आम लोगों के बीच भी इस बात को लेकर चिंता है कि अगर मतदाता सूची में ऐसे फर्जी नाम बने रहे, तो निष्पक्ष चुनाव कैसे होंगे।
अब सबकी नजर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर वे 1.5 करोड़ वोटर कौन हैं, जिन्हें नोटिस भेजे गए हैं, और उनके नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे। इस पूरे मामले ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




