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तिरुपति मंदिर ‘दान पेटी घोटाला’: टीडीपी का बड़ा हमला, वाईएसआरसीपी ने कहा—यह बदले की राजनीति

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विजयवाड़ा 24 सितंबर 2025

आंध्र प्रदेश की सियासत इन दिनों एक धार्मिक घोटाले को लेकर गरमा गई है। देश के सबसे पवित्र और समृद्ध मंदिरों में गिने जाने वाले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम्स (TTD) की दान पेटियों से जुड़ा मामला एक बार फिर राजनीतिक तकरार का केंद्र बन गया है। विपक्षी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने आरोप लगाया है कि वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) सरकार के समय मंदिर की दान पेटियों से निकाले गए करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ और इस पैसे को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया। दूसरी तरफ, वाईएसआरसीपी ने इसे बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित करार देते हुए पलटवार किया है।

टीडीपी के गंभीर आरोप

टीडीपी नेताओं ने दावा किया कि मंदिर की दान पेटियों से जमा रकम को व्यवस्थित तरीके से बाहर भेजा गया और इसमें तत्कालीन प्रशासन की मिलीभगत थी। उनका आरोप है कि यह पैसा केवल धार्मिक उद्देश्यों पर खर्च नहीं किया गया, बल्कि बड़े पैमाने पर निजी निवेश और राजनीतिक गतिविधियों के लिए प्रयोग हुआ। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस घोटाले में उस समय के शीर्ष अधिकारी और टीटीडी बोर्ड के अध्यक्ष शामिल थे, जिनकी देखरेख में दान पेटियों की गिनती और प्रबंधन होता था।

वाईएसआरसीपी का पलटवार

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि टीडीपी धार्मिक आस्था के नाम पर जनता की भावनाओं से खेल रही है। उनका कहना है कि जब भी मंदिर से जुड़ा कोई विवाद सामने आता है, विपक्षी दल इसे बढ़ा-चढ़ाकर चुनावी मुद्दा बना देते हैं। वाईएसआरसीपी नेताओं का दावा है कि मंदिर प्रशासन ने हर लेन-देन का हिसाब रखा है और पैसे का दुरुपयोग नहीं हुआ।

अदालत का दखल और जांच का आदेश

इस विवाद ने न्यायपालिका को भी हस्तक्षेप करने पर मजबूर किया है। आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए सीआईडी (CID) को निर्देश दिया है कि 2023 में हुई घटनाओं से जुड़े सभी रिकॉर्ड जब्त किए जाएं और जांच दोबारा शुरू की जाए। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि आखिरकार इतने बड़े घोटाले के मामले को लोक अदालत में क्यों निपटाया गया और क्या यह किसी कवर-अप (ढकने) का हिस्सा था। अदालत का यह रुख राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर रहा है और विपक्ष को नया मुद्दा मिल गया है।

समाज और राजनीति पर असर

तिरुपति मंदिर केवल एक धार्मिक स्थान नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां की दान पेटियों से हर साल हजारों करोड़ रुपये की रकम आती है, जिसे जनकल्याण और धार्मिक कार्यों में लगाया जाता है। ऐसे में इस धन के दुरुपयोग के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस विवाद ने सत्ता और विपक्ष दोनों की रणनीति बदल दी है—एक ओर टीडीपी इसे चुनावी हथियार बना रही है, वहीं वाईएसआरसीपी इसे बदले की राजनीति कहकर जनता की सहानुभूति हासिल करना चाहती है।

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