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सेना, सिंदूर और सवालों की सियासत: ‘माफी नहीं मांगूंगा’, भविष्य के युद्धों में बड़ी सेना पर भी पृथ्वीराज चव्हाण का बड़ा बयान

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अमरनाथ । मुंबई 17 दिसंबर 2025

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण अपने बयानों को लेकर लगातार चर्चा में हैं। एक तरफ उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर दिए गए बयान को लेकर माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है, तो दूसरी तरफ उन्होंने भविष्य के युद्धों और भारतीय सेना के आकार को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। उनके इन दोनों बयानों ने राजनीति के साथ-साथ सुरक्षा मामलों में भी बहस तेज कर दी है।

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उठे विवाद पर पृथ्वीराज चव्हाण ने साफ कहा है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा, इसलिए माफी मांगने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उनका कहना है कि उन्होंने सेना का अपमान नहीं किया, बल्कि सरकार से सवाल पूछे हैं। चव्हाण के मुताबिक, लोकतंत्र में सवाल पूछना हर नागरिक और नेता का अधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकार को सैन्य अभियानों पर सिर्फ भावनात्मक बातें नहीं करनी चाहिए, बल्कि तथ्य भी देश के सामने रखने चाहिए।

चव्हाण ने यह भी आरोप लगाया कि उनके बयान को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती दिन भारत को रणनीतिक नुकसान हुआ, इस पर चर्चा होना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। उन्होंने दोहराया कि सेना का सम्मान और सरकार से जवाबदेही — दोनों एक साथ हो सकते हैं। हर सवाल को राष्ट्रविरोधी कहना सही नहीं है।

दूसरी ओर, पृथ्वीराज चव्हाण ने भविष्य के युद्धों को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि आने वाले समय में युद्ध जमीन पर बड़ी सेनाओं के आमने-सामने लड़ने से नहीं, बल्कि हवाई शक्ति, मिसाइल, ड्रोन और आधुनिक तकनीक से लड़े जाएंगे। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत को 12–15 लाख सैनिकों वाली इतनी बड़ी पारंपरिक सेना की जरूरत है।

चव्हाण के मुताबिक, हाल के सैन्य संघर्षों से साफ हो गया है कि अब फैसले वायुसेना और मिसाइल सिस्टम तय करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान जैसे देशों के बीच अब बड़े स्तर पर जमीनी युद्ध की संभावना कम है, क्योंकि दोनों देशों के पास परमाणु हथियार हैं। अगर कभी संघर्ष होता भी है, तो वह सीमित और तकनीकी होगा, न कि बड़े पैमाने पर सैनिकों को उतारकर।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से कहीं मजबूत है और देश के पास पहले से रणनीतिक बढ़त है। ऐसे में सेना से जुड़े संसाधनों और मानव शक्ति का इस्तेमाल सिर्फ रक्षा ही नहीं, बल्कि देश के विकास और सुरक्षा के दूसरे क्षेत्रों में भी बेहतर तरीके से किया जा सकता है।

हालांकि, चव्हाण के इन बयानों पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि ऐसे बयान सेना का मनोबल गिराते हैं और देश को गलत संदेश देते हैं। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति कर रही है। वहीं सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक का महत्व जरूर बढ़ा है, लेकिन जमीनी सेना की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कुल मिलाकर, पृथ्वीराज चव्हाण के बयान अब सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं रहे हैं। ये बयान राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना की भूमिका, भविष्य के युद्ध और लोकतंत्र में सवाल पूछने की सीमा जैसे बड़े मुद्दों पर बहस का केंद्र बन गए हैं। एक तरफ सरकार और भाजपा है, जो इसे सेना के सम्मान से जोड़ रही है, तो दूसरी तरफ चव्हाण हैं, जो साफ कह रहे हैं — सवाल पूछना लोकतंत्र की आत्मा है और माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता।

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