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पश्चिम एशिया संकट से हवाई यात्रा चरमराई, खाड़ी देशों का एयरस्पेस बंद; दुबई-दोहा में उड़ानें ठप

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली/दुबई/दोहा | 28 फरवरी 2026

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का सबसे तात्कालिक और व्यापक असर हवाई यात्रा पर पड़ा है। अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमलों और ईरान की जवाबी मिसाइल कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र का आसमान लगभग खाली हो गया है। ईरान, इराक, इज़रायल, कुवैत, बहरीन, कतर और जॉर्डन ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म पर इन देशों के ऊपर उड़ानों की संख्या अचानक शून्य के करीब पहुंच गई, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है।

दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट—दुनिया के सबसे व्यस्त ट्रांजिट हब में से एक—ने एहतियातन उड़ान संचालन रोक दिया है। टर्मिनलों के बाहर और अंदर यात्रियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें या तो रद्द कर दी गई हैं या फिर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई हैं। एमिरेट्स, कतर एयरवेज, फ्लाईदुबई और अन्य क्षेत्रीय एयरलाइंस ने इज़रायल, ईरान, इराक और आसपास के देशों के लिए अपनी सेवाएं निलंबित कर दी हैं। दोहा के हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी उड़ानों का संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है, क्योंकि कतर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाए जाने की खबरों के बाद सुरक्षा स्तर बढ़ा दिया गया है।

एविएशन विश्लेषकों के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार इज़रायल जाने वाली लगभग 40 प्रतिशत उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, जबकि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र की करीब 6 से 7 प्रतिशत उड़ानें प्रभावित हुई हैं। यह आंकड़ा आने वाले घंटों में और बढ़ सकता है, क्योंकि कई एयरलाइंस हालात का आकलन कर रही हैं। यूरोप से एशिया और एशिया से यूरोप जाने वाली उड़ानों को अब लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे यात्रा समय कई घंटों तक बढ़ सकता है और ईंधन लागत में भी इजाफा हो रहा है। कुछ एयरलाइंस ने सऊदी अरब के ऊपर से रीरूटिंग शुरू की है, जबकि अन्य ने दक्षिणी मार्ग अपनाया है।

एयरस्पेस बंद होने से कार्गो उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं। पश्चिम एशिया वैश्विक माल परिवहन का अहम गलियारा है, और दुबई तथा दोहा बड़े कार्गो हब माने जाते हैं। उड़ानों में रुकावट से सप्लाई चेन पर दबाव पड़ सकता है, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और ताजा खाद्य पदार्थों की आपूर्ति पर। तेल की कीमतों में संभावित उछाल और विमानों की परिचालन लागत बढ़ने से टिकट दरों में वृद्धि की आशंका भी जताई जा रही है।

सबसे ज्यादा चिंता उन यात्रियों की है जो ट्रांजिट में फंसे हुए हैं। दुबई और दोहा एयरपोर्ट पर हजारों यात्री अपनी अगली उड़ान का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कई लोगों की कनेक्टिंग फ्लाइट्स रद्द हो चुकी हैं। एयरलाइंस यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था देने और रिफंड प्रक्रिया शुरू करने में जुटी हैं, लेकिन स्थिति लगातार बदल रही है। कई कंपनियों ने मार्च के शुरुआती सप्ताह तक प्रभावित रूट्स पर सेवाएं स्थगित रखने का संकेत दिया है।

भारत के लिए भी यह स्थिति अहम है, क्योंकि खाड़ी देशों के रास्ते बड़ी संख्या में भारतीय यात्री यूरोप और अमेरिका की यात्रा करते हैं। लाखों भारतीय कामगार भी इसी क्षेत्र में रहते हैं और नियमित रूप से यात्रा करते हैं। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो भारतीय यात्रियों को लंबे रूट, महंगे टिकट और अनिश्चित उड़ानों का सामना करना पड़ सकता है।

फिलहाल विमानन क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है। एयरलाइंस और अंतरराष्ट्रीय एविएशन एजेंसियां हालात पर करीबी नजर रखे हुए हैं। पश्चिम एशिया का आसमान कब सामान्य होगा, यह पूरी तरह क्षेत्रीय तनाव की दिशा पर निर्भर करेगा।

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