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सरकार डरी हुई है: खड़गे का आरोप, बोले—वोट का अधिकार छिना तो लोकतंत्र और संविधान दोनों खतरे में

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 9 अक्टूबर 2026

दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों और विरोध-प्रदर्शनों से डर गई है। खड़गे ने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने भी ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार उन्हें पद से हटाने के लिए तैयार नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उनकी सरकार खड़ी है।

खड़गे ने दिल्ली में कहा कि कांग्रेस कई वर्षों से चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं को सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने उठा रही है, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश को संविधान मिला और संविधान ने जनता को वोट देने का अधिकार दिया, लेकिन अब उसी अधिकार पर खतरा मंडरा रहा है। खड़गे ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के जरिए लोगों के मतदान के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का वोट केवल चुनाव जीतने का साधन नहीं, बल्कि नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी और संवैधानिक अधिकारों की बुनियाद है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर निशाना साधते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार इस पूरे विवाद में एक छोटी कड़ी हैं और उनके पीछे मोदी-शाह तथा केंद्र सरकार का समर्थन है। खड़गे के मुताबिक, सरकार की मंशा लोगों के अधिकारों को सीमित करने और सत्ता को अधिक केंद्रीकृत करने की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि देश में तानाशाही की स्थिति पैदा होती है, तो लोकतंत्र कमजोर होगा और संविधान से मिले अधिकार भी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और जनता के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है।

खड़गे ने यह भी घोषणा की कि कांग्रेस और विपक्षी दल इस मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को बताया जाएगा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भागीदारी का सबसे महत्वपूर्ण आधार उसका वोट देने का अधिकार है। यदि इस अधिकार पर सवाल खड़े होते हैं, तो पूरे लोकतांत्रिक ढांचे पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस की मांग है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच हो और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय की जाए।

कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पूरी तरह डरी हुई है। वेणुगोपाल ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में आंदोलन और जुलूस होना स्वाभाविक है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इनसे लोकतांत्रिक तरीके से निपटे। उनके आरोप के मुताबिक, मौजूदा सरकार विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए तानाशाहीपूर्ण रवैया अपना रही है।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और वामपंथी संगठनों ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और SIR के दौरान कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया है और राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। मेट्रो स्टेशनों को बंद करने की घोषणा, कुछ रेल सेवाओं को रद्द किए जाने और सड़कों पर बैरिकेडिंग को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस इन प्रतिबंधों को आम लोगों की आवाजाही और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जोड़ रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठे हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब देने के बजाय सरकार विरोध की आवाज को रोकने में लगी है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के आयुक्तों की कथित आपत्तियों, SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष और दस्तावेजी पुष्टि इस विवाद की पूरी तस्वीर समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले राजनीतिक संघर्ष का केंद्र अब केवल SIR नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता, नागरिकों के मतदान के अधिकार और शांतिपूर्ण विरोध की स्वतंत्रता भी बन गया है।

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