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“रामराज्य की शर्त” का झूठ फैलाने वालों की साजिश बेनकाब, नेपाल पीएम के नाम पर फर्जी नैरेटिव से माहौल बिगाड़ने की थी कोशिश

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अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू/नई दिल्ली | 14 अप्रैल 2026

नेपाल के प्रधानमंत्री Balendra Shah के नाम पर “भारत के सामने रामराज्य घोषित करने की शर्त” जैसी मनगढ़ंत और भड़काऊ खबर फैलाकर देश का माहौल खराब करने की कोशिश करने वाले अब बेनकाब हो चुके हैं। तथ्यों की पड़ताल में यह साफ हो गया है कि ऐसा कोई बयान न कभी दिया गया और न ही किसी आधिकारिक बातचीत में इस तरह की कोई शर्त रखी गई। इसके बावजूद सुनियोजित तरीके से इस झूठ को सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, ताकि धार्मिक भावनाओं को भड़काकर नफरत की राजनीति को हवा दी जा सके।

यह कोई सामान्य अफवाह नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत तैयार किया गया नैरेटिव था। “रामराज्य” जैसे संवेदनशील और भावनात्मक शब्द का इस्तेमाल करके लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई, जिससे भारत और नेपाल के बीच अविश्वास पैदा हो और समाज में अनावश्यक तनाव बढ़े। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के कई लोगों ने इस झूठ को सच मानकर आगे फैलाया, जिससे स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी रही।

असलियत यह है कि नेपाल और भारत के रिश्ते इस समय सहयोग और संवाद के नए दौर में आगे बढ़ रहे हैं। Narendra Modi के निमंत्रण को स्वीकार करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दोनों देशों के बीच सकारात्मक माहौल है। ऐसे समय में इस तरह की झूठी खबरें फैलाना सीधे-सीधे कूटनीतिक रिश्तों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है। सवाल यह उठता है कि आखिर किसे फायदा है इस तरह के झूठ से? जवाब साफ है—उन्हीं तत्वों को, जो समाज को बांटकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहते हैं।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि फेक न्यूज अब सिर्फ अफवाह नहीं रही, बल्कि एक खतरनाक हथियार बन चुकी है। इसके जरिए लोगों की भावनाओं से खेला जा रहा है, समाज में दरार डालने की कोशिश की जा रही है और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों तक को प्रभावित करने की साजिश रची जा रही है। अगर समय रहते ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रवृत्ति और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकती है।

अब वक्त आ गया है कि समाज भी जागरूक हो और हर वायरल खबर को आंख बंद करके स्वीकार करने की बजाय उसकी सच्चाई को परखे। सरकार और एजेंसियों को भी ऐसे अफवाहबाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह देश और समाज के खिलाफ साजिश करने की हिम्मत न कर सके।

साफ शब्दों में कहें तो “रामराज्य की शर्त” का पूरा मामला एक झूठा और भ्रामक प्रचार था, जिसका मकसद सिर्फ नफरत फैलाना और माहौल बिगाड़ना था। अब जब सच सामने आ चुका है, तो जरूरी है कि ऐसे झूठ फैलाने वालों को बेनकाब किया जाए और समाज को इस तरह की साजिशों से बचाया जाए।

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