अमेरिका की राजनीति में भारतीय मूल के नेतृत्व की चमक लगातार बढ़ती जा रही है। यह केवल भारतीय समुदाय के बढ़ते प्रभाव का संकेत नहीं, बल्कि इस बात का भी प्रमाण है कि मेहनत, विश्वास और नेतृत्व क्षमता की कोई सीमा नहीं होती। ताज़ा परिणामों से यह साफ दिखता है कि भारतीय मूल के नेताओं ने न केवल मुख्यधारा की राजनीति में अपनी पहचान स्थापित की है, बल्कि महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचकर इतिहास भी रच दिया है।
ग़ज़ाला हाशमी—पहली भारतीय मूल मुस्लिम महिला बनीं लेफ्टिनेंट गवर्नर
वर्जीनिया में ग़ज़ाला हाशमी ने ऐसा इतिहास रच दिया है, जो भारतीय मूल के अमेरिकियों के लिए गर्व का क्षण है। वे पहली भारतीय मूल की मुस्लिम महिला हैं जिन्हें राज्य की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में चुना गया है। शिक्षाविद् से राजनीति तक का उनका सफर प्रेरणा देता है कि समाज सेवा और लोगों के मुद्दों पर काम करते हुए कैसे कोई नेता जनता के दिलों में जगह बना सकता है। उनका यह विजय सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि विविधता और समावेशिता की दिशा में अमेरिका के आगे बढ़ने की मजबूत मिसाल है।
अफताब पुरेवाल—एक बार फिर बना जनता का भरोसेमंद चेहरा
सिनसिनाटी में अफताब पुरेवाल ने एक बार फिर मेयर पद पर जीत दर्ज कर अपना नेतृत्व साबित कर दिया है। भारतीय मूल के इस डेमोक्रेट नेता ने अपने पहले कार्यकाल में शहर के विकास और नागरिक कल्याण की जो पहल की, उसी ने उन्हें दोबारा जीत की राह दिखाई। युवा नेतृत्व और प्रगतिशील दृष्टिकोण ने उन्हें वहां की राजनीति का महत्वपूर्ण चेहरा बना दिया है।
ज़ोहरान ममदानी—नए युग की राजनीति का मजबूत चेहरा
न्यूयॉर्क से विधायक ज़ोहरान ममदानी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं। वे अपनी राजनीतिक स्पष्टता, हिम्मत और लोगों के हितों की राजनीति के लिए जाने जाते हैं। आवास, शिक्षा और आप्रवासी अधिकारों जैसे अहम मुद्दों पर उनकी सक्रिय आवाज़ उन्हें अमेरिकी राजनीति के प्रभावी और युवा नेता के रूप में स्थापित करती है। उनकी उपलब्धियां भारतीय मूल के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो दुनिया के किसी भी मंच पर अपनी पहचान और नेतृत्व स्थापित करना चाहते हैं।
अमेरिका में भारतीय समुदाय की बढ़ती राजनीतिक ताकत
इन तीनों सफलताओं ने एक बार फिर दुनिया को यह दिखा दिया है कि भारतीय मूल के लोग जहाँ भी जाते हैं, वहाँ सिर्फ बसते नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने की क्षमता भी रखते हैं। यह भारत-अमेरिका संबंधों को सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर और मजबूत करने का संकेत भी है, जहाँ भारतीय विचार, मूल्य और नेतृत्व वैश्विक मंच पर अपनी जगह बनाते जा रहे हैं। भारतीयों के लिए यह गर्व का क्षण है—क्योंकि यह जीत सिर्फ राजनीतिक नहीं, प्रतिनिधित्व, सम्मान और मेहनत की जीत है।




