राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 14 जून 2026
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा है कि INDIA गठबंधन ने प्रभावी रूप से 2029 का लोकसभा चुनाव पहले ही जीत लिया है। राहुल गांधी का कहना है कि विपक्ष ने 2024 का चुनाव वास्तव में हारा नहीं था और यदि विपक्षी दल एकजुट रहे तो 2029 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हराना कठिन नहीं होगा।
राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन की हालिया बैठक में दिए अपने भाषण का हिंदी संस्करण साझा करते हुए कहा कि देश में जनता के बीच बढ़ता असंतोष और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां विपक्ष के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है और यदि सभी दल साथ खड़े रहते हैं तो अगले आम चुनाव में जीत सुनिश्चित है।
राहुल गांधी के अनुसार 2024 के चुनाव परिणामों को केवल सीटों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि विपक्ष ने भाजपा को पहले की तुलना में काफी चुनौती दी और यही राजनीतिक प्रवृत्ति आगे भी जारी रहने वाली है। उन्होंने कहा कि जनता के भीतर जो नाराजगी दिखाई दे रही है, वह 2029 के चुनावी परिणामों की दिशा पहले ही तय कर चुकी है।
हालांकि राहुल गांधी ने इसके साथ एक बड़ी चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनाव जीतना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष हों। उन्होंने विपक्षी दलों से संगठित प्रतिरोध और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया।
INDIA गठबंधन की बैठक के दौरान राहुल गांधी ने उन दावों को भी खारिज किया कि विपक्षी दलों के बीच समन्वय की कमी है। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार यह धारणा बनाने की कोशिश करती है कि विपक्ष बिखरा हुआ है, जबकि वास्तविकता यह है कि लोकतंत्र, संविधान और “भारत के विचार” की रक्षा के सवाल पर विपक्षी दल एकजुट हैं।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब INDIA गठबंधन के भीतर कई राज्यों में राजनीतिक मतभेद और सीट बंटवारे को लेकर बहस चल रही है। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व लगातार विपक्षी एकता को 2029 की सबसे बड़ी राजनीतिक रणनीति के रूप में पेश कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान केवल चुनावी दावा नहीं बल्कि विपक्षी कार्यकर्ताओं और सहयोगी दलों को एकजुट रखने का प्रयास भी है। आने वाले विधानसभा चुनाव और विपक्षी दलों के बीच तालमेल की स्थिति यह तय करेगी कि 2029 के लिए राहुल गांधी का यह आत्मविश्वास राजनीतिक हकीकत में कितना बदल पाता है।




