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कहानी, खुशबू और सैंडविच: जब ज़िंदगी ने रसोई में रचा दर्शन

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नई दिल्ली, 12 अगस्त 2025

लेखक: निष्ठा त्रिपाठी, छात्रा, मीडिया साइकोलॉजी, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, दिल्ली-एनसीआर

परिचय एक खास शख्सियत से

राज दरबारी ने अपनी यात्रा मात्र 16 वर्ष की अल्पायु में आरंभ की और फ़िल्म निर्माण, कहानी कहने तथा पत्रकारिता के क्षेत्रों में अपार उत्कृष्टता हासिल की। उन्होंने जनरल ज़िया और यासर अराफ़ात जैसे विश्व के प्रभावशाली नेताओं के साक्षात्कार लिए, भारत की महत्वपूर्ण नीतियों को प्रभावित करने में योगदान दिया, तथा अमेरिका के विख्यात चैनल विज़न ऑफ़ एशिया टीवी के लिए एक स्टार रिपोर्टर के रूप में अपनी पहचान बनाई।

फ़िल्म निर्माण और पत्रकारिता के अतिरिक्त, उन्होंने विश्व स्तरीय पुस्तकें भी लिखीं, जिनमें ‘इंदिरा गांधी के 1028 दिन’ और ‘कॉमनवेल्थ और नेहरू’ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनकी कृति और कार्यों के लिए उन्हें हिन्द रत्न पुरस्कार तथा राष्ट्रीय एकता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हर दृष्टि से राज दरबारी एक प्रेरणा स्रोत हैं, जिनकी उपलब्धियाँ हमें दृढ़ता और समर्पण की मिसाल देती हैं।

रसोई में जन्मी एक मुलाक़ात

तेज़-तर्रार ज़िंदगी की आपाधापी में कई बार हम उन लम्हों से दूर हो जाते हैं, जो हमारे भीतर के इंसान को छूकर हमें और गहराई से जीने का एहसास कराते हैं। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में, एक धूप से भरी दोपहर, मीडिया साइकोलॉजी की छात्रा राशि गुप्ता और प्रसिद्ध कवयित्री-लेखिका डॉ. राज लक्ष्मी दरबारी आमने-सामने बैठीं। सामने किचन काउंटर पर ताज़ा मक्खन, कटी हुई मशरूम और चीज़ के स्लाइस रखे थे। पैन में हल्की-हल्की छनक और हवा में तैरती मक्खन की महक ने माहौल को किसी पुरानी कविता की तरह मुलायम बना दिया। जैसे-जैसे सैंडविच के लिए मशरूम भुनने लगे, वैसे-वैसे उनकी बातचीत भी अनुभव, संवेदना और जीवन के दर्शन की परतों में सिमटने लगी।

साधारण में छिपा असाधारण

डॉ. दरबारी मशरूम को पलटते हुए मुस्कुराईं और बोलीं—”जैसे इस सैंडविच की परतें अलग-अलग स्वादों को एक साथ जोड़ती हैं, वैसे ही ज़िंदगी भी अनगिनत अनुभवों, यादों और भावनाओं की परतों से बनी होती है। हर निवाला एक कहानी कहता है, हर सांस में एक किस्सा छुपा होता है—बस हम सुनना भूल जाते हैं।” उनकी बात पर राशि ने हल्के हंसी के साथ जवाब दिया—”विज्ञान भी यही कहता है—हम केवल देखते नहीं, महसूस करते हैं। स्वाद और गंध हमें समय में पीछे ले जाते हैं—कभी बचपन की गर्मियों में, तो कभी दादी के हाथ की बनी किसी डिश के पास।” उस वक्त पैन में सिकते मशरूम की खुशबू मानो स्मृतियों का दरवाज़ा खोल रही थी।

लेखन: आत्मा से आत्मा तक की यात्रा

चाय के कप से उठती भाप के बीच डॉ. दरबारी ने अपने लेखन के अनुभव को साझा करते हुए कहा—”मेरे लिए लिखना केवल शब्दों को जोड़ने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के अंधेरे में रोशनी जलाने जैसा है। हर कविता मुझे मेरे ही भीतर की गहराई में ले जाती है। यह मुझे मेरी कमजोरियों से भी मिलवाती है और मेरी ताकतों को भी पहचानने देती है।” उनकी बातों में एक गहरी सच्चाई थी—लेखन उनके लिए एक साधना थी, जिसमें शब्द साधन बनते हैं और संवेदना साध्य। राशि ध्यान से सुन रही थी, मानो हर वाक्य उसके भीतर किसी नई खिड़की को खोल रहा हो।

शब्दों से बदलाव की संभावना

राशि ने हल्की जिज्ञासा के साथ पूछा—”क्या आपकी कविताएं सच में समाज को बदल सकती हैं?” इस पर डॉ. दरबारी की आंखों में चमक उतर आई—”बिलकुल। कविता और कहानी सिर्फ भावनाएं नहीं, यह ऐसे औज़ार हैं जो सदियों से मौन की जंजीरों को तोड़ते आए हैं। महिलाओं की चुप्पी को आवाज़ देने से लेकर, उनके विचारों को पंख देने तक—शब्द बदलाव का बीज हैं। जब कोई अपना अनुभव, अपनी पीड़ा या अपना सपना शब्दों में पिरोता है, तो वह सिर्फ अपनी कहानी नहीं कहता, बल्कि कई और आवाज़ों को जगाता है।”

संवेदनशीलता: मानवता की सच्ची भाषा

बातचीत संवेदनशीलता पर पहुंची तो दोनों एकमत थीं कि आज के समय में सबसे अहम चीज़ है ‘महसूस करना’। डॉ. दरबारी ने कहा—”सिर्फ सुन लेना काफी नहीं है। हमें सुनाई गई हर आवाज़ को महसूस भी करना होगा। यही वह क्षण है, जब हम सच में इंसान होने का अनुभव करते हैं।” राशि ने सहमति जताते हुए जोड़ा—”मीडिया साइकोलॉजी भी हमें यही सिखाती है—हर न्यूज़ रिपोर्ट, हर इंटरव्यू, हर डॉक्यूमेंट्री के पीछे एक इंसान होता है, जिसकी अपनी भावनाएं, संघर्ष और उम्मीदें होती हैं।” उनकी बातें मानो यह याद दिला रही थीं कि संवेदनशीलता ही वह पुल है, जो हमें अलग-अलग जीवनों से जोड़ता है।

सैंडविच और जीवन का सबक

जब मशरूम और चीज़ से बना सैंडविच आखिरकार प्लेट में आया, डॉ. दरबारी ने उसे देखते हुए कहा—”देखो, यह सैंडविच किसी जीवन के सफर जैसा है—परत दर परत भावनाओं, अनुभवों और कहानियों का मेल। हर निवाला हमें हमारे भीतर के किसी हिस्से से जोड़ देता है।” राशि ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया—”शायद यही जीवन का सबसे बड़ा रहस्य है—साधारण चीज़ों में गहराई तलाशना और उसे पूरे दिल से महसूस करना।”

आख़िरी बात: स्वाद, शब्द और आत्मा
यह महज़ एक दोपहर का संवाद नहीं था—यह भावनाओं, विचारों और आत्मीय जुड़ाव का संगम था। कविता हो या सैंडविच, जब हम अपने अनुभवों और संवेदनाओं को बांटते हैं, तो हम इंसानियत के सबसे करीब पहुंचते हैं। डॉ. दरबारी के अंतिम शब्द आज भी गूंजते हैं—”हर कहानी, हर स्वाद और हर शब्द में हमारी आत्मा का एक अंश छुपा होता है। उसे महसूस करना और दूसरों तक पहुंचाना ही जीवन की सबसे बड़ी महिमा है।”

 

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