सुमन कुमार। नई दिल्ली 17 दिसंबर 2025
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में संगठित अपराध की बढ़ती चुनौती को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद अहम और दूरगामी टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा है कि NCR में सक्रिय गैंगस्टर और बड़े अपराधी राज्य की सीमाओं का फायदा उठाकर आसानी से गिरफ्तारी से बच निकलते हैं। दिल्ली में वारदात, फिर हरियाणा या उत्तर प्रदेश में पनाह — यही पैटर्न अब अपराधियों की सबसे बड़ी ढाल बन चुका है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि पूरे NCR के लिए एक ही पुलिस एजेंसी या एकीकृत कानून व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद जैसे इलाके भले ही प्रशासनिक रूप से अलग-अलग राज्यों में आते हों, लेकिन अपराध के लिहाज से यह पूरा इलाका एक ही इकाई की तरह काम करता है। गैंगस्टर जानते हैं कि जैसे ही वे एक राज्य की सीमा पार करेंगे, पुलिस की कार्रवाई धीमी हो जाएगी, नए सिरे से कागजी प्रक्रिया शुरू होगी और इसी देरी का फायदा उठाकर वे कानून से बच निकलते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे मौजूदा सिस्टम की सबसे बड़ी कमजोरी बताया।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि अलग-अलग राज्यों की पुलिस, अलग कानून और अलग अदालतों के कारण एक ही अपराध से जुड़े कई मुकदमे अलग-अलग जगहों पर चल रहे होते हैं, जिससे न केवल जांच प्रभावित होती है बल्कि न्याय में भी भारी देरी होती है। कई मामलों में आरोपी इसी देरी का लाभ उठाकर जमानत पा जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति कानून के राज और पीड़ितों — दोनों के लिए बेहद नुकसानदेह है।
इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सुझाव दिया कि NCR के लिए एक विशेष एजेंसी, एक विशेष कानून और एक या कुछ चिन्हित अदालतें बनाई जा सकती हैं, जहां पूरे NCR से जुड़े संगठित अपराधों की सुनवाई हो। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे UAPA, PMLA या NDPS जैसे कानूनों में एकीकृत ढांचा होता है, उसी तरह NCR के लिए भी एक व्यापक और समन्वित व्यवस्था बनाई जा सकती है।
कोर्ट का मानना है कि अगर NCR को अपराध नियंत्रण के लिहाज से एक इकाई मान लिया जाए, तो गैंगस्टरों की ‘राज्य बदलो, गिरफ्तारी टालो’ वाली रणनीति पूरी तरह फेल हो जाएगी। इससे पुलिस को बिना क्षेत्राधिकार विवाद के कार्रवाई करने की ताकत मिलेगी और ट्रायल भी तेज होंगे। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा ढांचे में सिर्फ समन्वय बैठाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि कानूनी और संस्थागत स्तर पर ठोस बदलाव जरूरी हैं।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सिर्फ एक सुझाव नहीं, बल्कि केंद्र और राज्यों के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है। बढ़ते संगठित अपराध, गैंगवार और सुपारी किलिंग के दौर में अदालत ने साफ कर दिया है कि अगर NCR में कानून व्यवस्था को मजबूत करना है, तो पारंपरिक राज्य-सीमाओं से ऊपर उठकर सोचना होगा। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस सुझाव को सिर्फ नोट करती है या वास्तव में ‘एक NCR, एक कानून व्यवस्था’ की दिशा में कोई बड़ा कदम उठाती है।




