महेंद्र सिंह। नई दिल्ली 30 नवंबर 2025
चुनाव आयोग (ECI) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में Statement of Inclusion/Removal (SIR) की समय-सीमा को बढ़ाने का एलान कर दिया है, जिससे आगामी चुनावों की तैयारियों में लगे करोड़ों मतदाताओं, राजनीतिक दलों और प्रशासनिक मशीनरी को बड़ी राहत मिली है। यह विस्तार ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण, नए नाम जुड़वाने, पुराने नाम हटवाने, पता बदलवाने और त्रुटि सुधार की प्रक्रियाएँ भारी दबाव में थीं। आयोग का यह कदम चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा हस्तक्षेप माना जा रहा है, खासकर तब जब कई राज्यों में राजनीतिक दल लगातार शिकायत कर रहे थे कि SIR प्रक्रिया में समय की भारी कमी है और कई ज़िलों में फील्ड वेरिफिकेशन बाधित हो रहा है।
नए आदेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, असम, झारखंड, उत्तराखंड और चंडीगढ़ सहित कुल 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की डेडलाइन आगे बढ़ा दी गई है। आयोग ने साफ कहा है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक संवेदनशील और व्यापक अभ्यास है और इसे जल्दबाज़ी में पूरा करना न तो तकनीकी तौर पर संभव है और न लोकतांत्रिक दृष्टि से उचित। यही कारण है कि सभी राज्यों को नए सिरे से फील्ड वेरिफिकेशन, डेटा एंट्री और दस्तावेज़ी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जा रहा है। यह बदलाव मतदान केंद्रों के पुनर्गठन, नए शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों के मर्जर, और जनगणना संबंधित सीमा परिवर्तन के कारण भी आवश्यक हो गया था।
इस निर्णय के बाद चुनावी राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है, क्योंकि 2026 में कई महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और SIR प्रक्रिया का सीधा असर मतदाता सूची की अंतिम संरचना पर पड़ेगा। विपक्षी दलों ने जहां इसे स्वागत योग्य बताया है, वहीं कुछ दलों का आरोप है कि सरकार और आयोग मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक हित साध रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि SIR विस्तार संपूर्ण देश में समान रूप से लागू प्रशासनिक आवश्यकता है और इसका किसी राजनीतिक लाभ-हानि से कोई संबंध नहीं है।
नए शेड्यूल के तहत राज्यवार विस्तृत तारीखें जारी कर दी गई हैं, जिनमें नामांकन संशोधन, आपत्तियों के निपटान, अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन और BLO/ERO स्तर की प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग समयसीमाएँ निर्धारित की गई हैं। इससे लाखों नए युवा मतदाताओं और प्रवासी श्रमिकों को राहत मिलेगी, जिन्हें पहले की समय-सीमा में दस्तावेज़ उपलब्ध कराने में भारी मुश्किलें आ रही थीं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि तकनीकी दिक्कतें, पोर्टल सर्वर की बंदी, और राज्य स्तरीय प्रशासनिक देरी भी इस विस्तार का एक बड़ा कारण थीं।
आयोग का यह कदम दर्शाता है कि 2026 के चुनावी साल से पहले देश भर में मतदाता सूची को अधिकतम सटीक और त्रुटिरहित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। SIR प्रक्रिया केवल नाम जोड़ने या हटाने का अभ्यास नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद—मतदाता की पहचान और अधिकार—को मजबूत करने की अहम कड़ी है। अब देखना यह होगा कि राज्यों की मशीनरी इस विस्तारित समय को कैसे उपयोग करती है और क्या मतदाता सूची इस बार पहले से अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बन पाती है।





