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दितवाह का खतरा बढ़ा: श्रीलंका में 200 मौतों के बाद तमिलनाडु–आंध्र रेड अलर्ट पर

अंतरराष्ट्रीय डेस्क 30 नवंबर 2025

श्रीलंका में भीषण तबाही मचाने वाला चक्रवाती तूफान दितवाह (Ditwah) अब भारत के बेहद करीब पहुंच चुका है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार यह तूफान आज दोपहर तक चेन्नई से सिर्फ 80 किलोमीटर दूर रह गया है और तेजी से तमिलनाडु–पुडुचेरी तट की ओर बढ़ रहा है। सुबह 8:30 बजे के IMD अपडेट के मुताबिक दितवाह पुडुचेरी से 110 किमी दक्षिण-पूर्व और चेन्नई से 140 किमी दूर दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर केंद्रित था, लेकिन कुछ ही घंटों में इसके भारत के तट पर अधिकतम नजदीकी बिंदु तक पहुंच जाने की आशंका है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 30 नवंबर और 1 दिसंबर को तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा और तेलंगाना में भारी से बेहद भारी बारिश होगी, जबकि उत्तर तमिलनाडु और पुडुचेरी में गरज, बिजली और 60–80 किमी प्रति घंटे की तेज हवाएं चल सकती हैं।

श्रीलंका में दितवाह ने तबाही का ऐसा मंजर छोड़ा है कि पूरा देश गहरे सदमे में है। वहां 193 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 228 लोग लापता हैं। बाढ़, भूस्खलन और तेज हवाओं ने 9.6 लाख से अधिक लोगों को प्रभावित किया है। श्रीलंका के डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर (DMC) ने बताया कि 2.66 लाख परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है, जबकि भारत की NDRF और एयर फोर्स श्रीलंका के राहत अभियान में लगातार मदद कर रही हैं। दितवाह का यह रूप दर्शाता है कि भारत के दक्षिणी तटों पर भी इससे गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा के लिए तटीय जिलों में चेतावनी स्तर की तैयारियाँ तेज की जा चुकी हैं।

तमिलनाडु और पुडुचेरी प्रशासन ने अपने-अपने तटीय जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया है, जबकि आंध्र प्रदेश में भी कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। मछुआरों को समुद्र में न जाने का सख्त निर्देश है और बंदरगाहों पर ‘डेंजर सिग्नल नंबर 10’ फहराया जा रहा है। तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ पेड़ उखड़ने, बिजली ढाँचों को क्षति पहुंचने और फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। बेंगलुरु, चेन्नई और विशाखापट्टनम एयरपोर्ट पर भी कई उड़ानों पर प्रभाव पड़ सकता है, जिसके मद्देनजर एयरलाइंस ने एडवाइजरी जारी की है।

IMD का कहना है कि दितवाह के भारत के तट से टकराने की संभावना कम है, लेकिन इसके बेहद पास आने से भारी बारिश और तेज हवाएं विनाशकारी असर डाल सकती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी के तापमान में वृद्धि और मानसूनी पैटर्न में बदलाव के कारण ऐसे तूफानों की ताकत और आवृत्ति लगातार बढ़ रही है। यह सिर्फ मौसम की घटना नहीं, बल्कि बदलते जलवायु संकट का संकेत है, जिसे गंभीरता से लेना होगा। आने वाले 48 घंटे भारत के लिए बेहद संवेदनशील होंगे और तटीय राज्यों में राहत-बचाव टीमों, प्रशासनिक इकाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट पर रखा गया है।

अब पूरा देश दितवाह की अगली चाल पर नजर टिकाए हुए है—क्योंकि यह सिर्फ एक तूफान नहीं, बल्कि विनाश का एक चलता हुआ पर्वत है, जो श्रीलंका में तबाही मचाने के बाद भारत के सिर पर खड़ा है। तटीय नागरिकों से लेकर प्रशासन तक सभी को सतर्क रहने की सख्त जरूरत है।

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