राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 21 जुलाई 2026
पश्चिम बंगाल में मंगलवार को मनाया जाने वाला ‘शहीद दिवस’ इस बार राज्य की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच बन गया है। राज्य में भाजपा सरकार बनने के करीब दो महीने बाद पहली बार गैर-वाम विपक्ष अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी में है। खास बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट और कांग्रेस, तीनों ने कोलकाता में अलग-अलग रैलियों का आयोजन किया है।
तृणमूल कांग्रेस में जारी आंतरिक संकट के बीच एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट अपनी परंपरागत शहीद दिवस रैली करेगा, वहीं दूसरी ओर बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट भी अलग शक्ति प्रदर्शन करेगा। कांग्रेस ने भी इसी अवसर पर अपनी सभा आयोजित करने का फैसला किया है।
तीनों कार्यक्रम कोलकाता के लगभग तीन किलोमीटर के दायरे में आयोजित किए जा रहे हैं। सभी पक्ष अपने-अपने समर्थकों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने में जुटे हैं और पिछले कई दिनों से वरिष्ठ नेताओं द्वारा भीड़ जुटाने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया है।
दरअसल, 21 जुलाई 1993 को तत्कालीन युवा कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में 13 कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी। बाद में ममता बनर्जी ने इस दिन को ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाना शुरू किया। अब तृणमूल कांग्रेस के विभाजन के बाद दोनों गुट खुद को इस विरासत का वास्तविक उत्तराधिकारी बता रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीति में जनाधार और संगठनात्मक ताकत की पहली बड़ी परीक्षा भी है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद सभी दल अपने समर्थकों को एकजुट रखने और राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।
इस बीच सुरक्षा के मद्देनज़र कोलकाता में व्यापक पुलिस बंदोबस्त किए गए हैं। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है और यातायात व्यवस्था में भी विशेष बदलाव किए गए हैं, ताकि तीनों रैलियों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।




