Home » International » 286 दिन समुद्र में जंग के बाद थाईलैंड पहुंचा अमेरिकी युद्धपोत, जंग लगी परत और उखड़ा रंग देखकर उठे सवाल

286 दिन समुद्र में जंग के बाद थाईलैंड पहुंचा अमेरिकी युद्धपोत, जंग लगी परत और उखड़ा रंग देखकर उठे सवाल

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ला एम चाबांग, थाईलैंड | 4 सितंबर 2026

यूएसएस अब्राहम लिंकन की हालत ने खींचा ध्यान

अमेरिका का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन करीब 286 दिनों तक समुद्र में तैनाती के बाद बुधवार को थाईलैंड के ला एम चाबांग बंदरगाह पहुंचा। लंबे समय तक समुद्र और युद्ध क्षेत्र में रहने का असर अब इस विशाल युद्धपोत की बाहरी हालत पर साफ दिखाई दे रहा है। जहाज के बाहरी हिस्से पर जंग की धारियां नजर आ रही हैं, रंग कई जगह फीका पड़ चुका है और पानी की सतह के आसपास जहाज की सतह पर घिसावट साफ दिखाई दे रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल जहाज के बाहरी हिस्से पर जंग या खराब रंग देखकर उसकी युद्ध क्षमता पर सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता, लेकिन यह तस्वीर अमेरिकी नौसेना के एक ऐसे युद्धपोत की है जिसने असाधारण रूप से लंबी तैनाती के दौरान लगातार काम किया है।

करीब 5 हजार नौसैनिकों को मिला आराम का मौका

यूएसएस लिंकन पर करीब 5,000 नौसैनिक और मरीन तैनात हैं। जहाज 21 नवंबर 2025 को सैन डिएगो स्थित अपने ठिकाने से रवाना हुआ था और इसके बाद लंबे समय तक मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों का हिस्सा बना रहा। इस दौरान जहाज और उसके साथ चलने वाले युद्धपोतों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों, समुद्री नाकेबंदी और युद्ध संबंधी मिशनों में भूमिका निभाई। थाईलैंड में इस बार जहाज की मौजूदगी का मकसद कोई संयुक्त सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि सैनिकों को आराम और मानसिक तथा शारीरिक रूप से खुद को फिर से तैयार करने का अवसर देना है। इसके लिए जहाज के थाईलैंड में करीब चार से पांच दिन रुकने की उम्मीद है।

ALSO READ  ईरान से शांति वार्ता के लिए आखिर क्यों चुने गए JD Vance? इस्लामाबाद बातचीत के पीछे की पूरी कहानी

286 दिन लगातार समुद्र में रहना क्यों बड़ी बात है?

अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत आमतौर पर छह से नौ महीने तक तैनाती पर रहते हैं, लेकिन युद्ध जैसी परिस्थितियों में यह अवधि काफी बढ़ सकती है। रॉयटर्स की रिपोर्टिंग के अनुसार, लिंकन ने करीब 286 दिनों का लगातार समुद्री अभियान पूरा किया, जिसे अमेरिकी सांसदों ने आधुनिक दौर का एक असाधारण परिचालन रिकॉर्ड बताया है। बाद में यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन ने इसकी जगह जिम्मेदारी संभाली, जिससे लिंकन को वापस लौटने का मौका मिला। इतने लंबे समय तक समुद्र में रहने का मतलब केवल जहाज का लगातार चलते रहना नहीं है, बल्कि हजारों सैनिकों, विमानों, हथियारों, ईंधन, भोजन, स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी व्यवस्था को भी लगातार सक्रिय रखना होता है।

जंग लगी सतह सिर्फ लिंकन की कहानी नहीं

थाईलैंड पहुंची तस्वीरों में केवल लिंकन ही नहीं, बल्कि उसके साथ चलने वाले यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर और यूएसएस रॉबर्ट स्मॉल्स जैसे युद्धपोतों की पानी के आसपास की सतह पर भी जंग और फीके रंग के निशान दिखाई दिए। नौसैनिक विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक समुद्री पानी, नमी और लगातार सैन्य गतिविधियों के कारण युद्धपोतों के बाहरी हिस्से पर ऐसी घिसावट असामान्य नहीं है। पानी के करीब जमा जंग को हटाने के लिए सतह को साफ करना, घिसना और फिर कई परतों में सुरक्षात्मक रंग लगाना पड़ता है। यह काम तब काफी मुश्किल हो जाता है जब जहाज लगातार समुद्र में सक्रिय अभियान पर हो।

सिर्फ जहाज नहीं, 5 हजार लोगों पर भी पड़ा दबाव

लिंकन की लंबी तैनाती के दौरान जहाज पर मौजूद सैनिकों की परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठे। रॉयटर्स की रिपोर्टिंग में भोजन, स्वच्छता, पानी की पाइपलाइन, कपड़े धोने की सुविधा और संचार जैसी व्यवस्थाओं को लेकर कुछ परिवारों और सांसदों की चिंताओं का उल्लेख किया गया। लंबे मिशन के दौरान सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता सामने आई। हालांकि पेंटागन ने इन रिपोर्टों के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पहले जहाज पर परिस्थितियों से जुड़ी कुछ खबरों को गलत तरीके से पेश किए जाने की बात कही थी, जबकि एडमिरल ब्रैड कूपर ने जहाज का दौरा करने के बाद कहा था कि नौसेना के 11 विमानवाहक पोतों में लिंकन पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों की संख्या सबसे कम स्तरों में थी।

ALSO READ  अफगानिस्तान भूकंप: 800 से ज्यादा मौत, हजारों घायल, भारत ने भेजी मदद

युद्धपोत की असली ताकत सिर्फ हथियारों में नहीं होती

लिंकन की कहानी एक महत्वपूर्ण सैन्य सच्चाई भी सामने लाती है। किसी विमानवाहक पोत की ताकत केवल उसके लड़ाकू विमानों, मिसाइलों या हथियार प्रणालियों से तय नहीं होती। उसे लगातार सक्रिय रखने के लिए हजारों प्रशिक्षित लोगों, ईंधन, भोजन, तकनीकी कर्मचारियों, स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत और नियमित रखरखाव की जरूरत होती है। जितना ज्यादा समय कोई युद्धपोत समुद्र में तैनात रहता है, उतना ही ज्यादा रखरखाव का काम टलता जाता है। इसलिए लंबे युद्ध अभियान का दबाव जहाज की मशीनों के साथ-साथ उस पर तैनात सैनिकों पर भी पड़ता है।

थाईलैंड पहुंचना सिर्फ आराम नहीं, अमेरिकी नौसैनिक रणनीति का संकेत

कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तीन के कमांडर रियर एडमिरल रॉबर्ट लॉफ्रन ने थाईलैंड में रुकने को नौसैनिकों और मरीन के लिए आराम तथा खुद को फिर से तैयार करने का अवसर बताया। लिंकन की तैनाती यह भी दिखाती है कि ईरान के साथ लंबे संघर्ष ने अमेरिकी नौसेना के संसाधनों पर कितना दबाव डाला है। एक विमानवाहक पोत को लगातार हजारों किलोमीटर दूर सक्रिय रखना अमेरिका को क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी देता है, लेकिन दूसरी तरफ यही पोत लंबे समय तक रखरखाव और मानवीय संसाधनों की जरूरत भी बढ़ाता है। लिंकन की जगह दूसरे विमानवाहक पोत की तैनाती यह बताती है कि लंबे संघर्ष के दौरान लगातार सैन्य मौजूदगी बनाए रखने के लिए अमेरिका को अपने बड़े नौसैनिक बेड़े को लगातार घुमाना पड़ रहा है।

पत्ताया में भी दिखेगा अमेरिकी सैनिकों का असर

थाईलैंड में तैनाती के दौरान बड़ी संख्या में अमेरिकी नौसैनिक और मरीन पत्ताया भी जाएंगे, जो ला एम चाबांग से करीब 150 किलोमीटर दूर है। हजारों अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी से स्थानीय कारोबार को भी फायदा होने की उम्मीद है। अमेरिका और थाईलैंड के बीच लंबे समय से रक्षा संबंध हैं और थाई बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक जहाजों का आना-जाना पुराना है। इस बार हालांकि फोकस सैन्य अभ्यास पर नहीं, बल्कि आराम, मरम्मत और लंबी युद्ध तैनाती के बाद सैनिकों को राहत देने पर है।

ALSO READ  सऊदी अरब में बड़ा एक्शन: एक हफ्ते में 11,300 गिरफ्तार, हजारों प्रवासी किए गए डिपोर्ट

जंग की तस्वीर के पीछे छिपी बड़ी कहानी

यूएसएस अब्राहम लिंकन की जंग लगी बाहरी सतह को केवल एक पुराने या खराब युद्धपोत की तस्वीर के रूप में देखना सही नहीं होगा। यह करीब 286 दिनों की लगातार समुद्री तैनाती, युद्ध अभियानों और भारी परिचालन दबाव का दृश्य प्रमाण है। जंग लगी धातु को साफ किया जा सकता है और रंग दोबारा किया जा सकता है, लेकिन इतने लंबे अभियान के बाद जहाज, उसके उपकरण और उस पर तैनात हजारों सैनिकों को पर्याप्त रखरखाव और आराम देना अमेरिकी नौसेना के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना युद्ध क्षेत्र में उसकी मौजूदगी बनाए रखना।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted