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शशि थरूर का ऐलान—लोकतंत्र की बहाली तक अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज, SIR में बड़े पैमाने पर वोट कटने के आरोपों पर थरूर ने उठाए सवाल; बोले—चुनाव आयुक्त को विपक्ष का भरोसा हासिल होना जरूरी।

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 14 अक्टूबर 2026

‘अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा’

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर जारी विवाद के बीच कहा है कि जब तक लोकतंत्र की बहाली नहीं होती, तब तक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि चुनावी व्यवस्था की निगरानी करने वाली संस्था के प्रमुख को संदेह से परे होना चाहिए।

थरूर के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के प्रबंधन को लेकर प्रमुख विपक्षी दलों का मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त पर भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने इसे जवाबदेही का सवाल बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की ओर विपक्ष का मार्च

थरूर ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए विपक्षी मार्च को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए नागरिकों की भागीदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। इस मार्च में विपक्षी नेताओं, सांसदों, छात्रों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।

प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। पुलिस बैरिकेड लगाए गए और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर छह मेट्रो स्टेशनों पर सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित होने की बात सामने आई।

मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही तय करना थी।

13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटने का दावा

थरूर ने अपने लेख और सार्वजनिक मंचों पर दावा किया है कि देश में 13 करोड़ से अधिक नागरिकों को मनमाने ढंग से मतदान के अधिकार से वंचित किया गया है और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है।

उन्होंने इस संख्या की तुलना जापान, जर्मनी और ब्रिटेन की आबादी से करते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर मताधिकार प्रभावित होने का आरोप केवल प्रशासनिक चूक का विषय नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सवाल है।

हालांकि, 13 करोड़ से अधिक नागरिकों को मनमाने ढंग से मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने का आंकड़ा थरूर का दावा है। इसे देशभर में सत्यापित अंतिम आंकड़े के रूप में प्रस्तुत करने के लिए संबंधित मतदाता सूची, नाम हटाए जाने के कारणों और आधिकारिक आंकड़ों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

मताधिकार को बताया लोकतंत्र की बुनियाद

थरूर ने अपने लेख में कहा कि मताधिकार नागरिक और राज्य के बीच लोकतांत्रिक संबंध की बुनियाद है। उनके अनुसार, यदि बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ता है, तो चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

SIR को लेकर जारी विवाद के बीच विपक्ष की मांग है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी हो, प्रभावित नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने का प्रभावी अवसर मिले और चुनाव आयोग अपने फैसलों के पीछे स्पष्ट आधार प्रस्तुत करे।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बहस

इस पूरे विवाद के केंद्र में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही जैसे मुद्दे हैं। विपक्षी दल जहां इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं इन आरोपों का आकलन करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, प्रक्रिया संबंधी दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के जवाबों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

लोकतंत्र में चुनाव केवल मतदान कराने की प्रक्रिया नहीं है। मतदाता सूची की शुद्धता, प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अवसर और चुनावी संस्थाओं पर जनता का विश्वास भी उतने ही आवश्यक हैं। SIR को लेकर उठ रहे सवालों का पारदर्शी और तथ्य-आधारित जवाब ही इस विवाद में भरोसा बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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