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सुप्रीम कोर्ट में तीखी टिप्पणी: एंट्री बैन करवा देंगे, CJI सूर्यकांत याचिकाकर्ता पर नाराज़

[17:41, 20/4/2026] Ab national News: नई दिल्ली | 20 अप्रैल 2026

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और इस बार एक अहम प्रस्ताव सामने आया है—‘5 सदस्यीय परिवार मॉडल’। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो लाखों सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो सकती है।

दरअसल, अभी तक वेतन तय करने में 3 सदस्यीय परिवार को आधार माना जाता रहा है। लेकिन समय के साथ महंगाई बढ़ी है और परिवारों का खर्च भी काफी बढ़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब सुझाव दिया गया है कि वेतन और भत्तों की गणना 5 लोगों के परिवार के हिसाब से की जाए। इसमें आमतौर पर पति-पत्नी और तीन बच्चों को शामिल किया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है…
[17:41, 20/4/2026] Ab national News: सुप्रीम कोर्ट में तीखी टिप्पणी: एंट्री बैन करवा देंगे, CJI सूर्यकांत याचिकाकर्ता पर नाराज़

राष्ट्रीय न्यायपालिका | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 20 अप्रैल 2026

देश की सर्वोच्च अदालत में सोमवार को एक सुनवाई के दौरान उस समय असामान्य स्थिति बन गई, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत ने एक याचिकाकर्ता पर कड़ी नाराज़गी जाहिर की। मामला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ा बताया जा रहा है, जिस पर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत का धैर्य जवाब दे गया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता बार-बार अदालत की कार्यवाही में हस्तक्षेप करता नजर आया और न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा कि अगर इस तरह का रवैया जारी रहा तो सुप्रीम कोर्ट में उसकी एंट्री तक बैन करने का आदेश देना पड़ेगा। कोर्ट की यह टिप्पणी पूरे घटनाक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा बन गई।

जानकारी के अनुसार, याचिका में नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे को उठाया गया था। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में गंभीरता और कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि न्यायालय कोई मंच नहीं है जहां बिना ठोस आधार के बार-बार एक ही मुद्दे को उठाया जाए।

मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि अदालत का समय बेहद कीमती है और इसका दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई व्यक्ति अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी संकेत दिया कि याचिका में पर्याप्त तथ्य और प्रमाण नहीं हैं, जिससे इसे आगे बढ़ाया जा सके। अदालत ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह पहले अपने दावों को प्रमाणित करने के लिए उचित दस्तावेज और साक्ष्य जुटाए, उसके बाद ही न्यायालय का दरवाजा खटखटाए।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक स्पष्ट संदेश है। अदालत पहले भी कई बार इस बात पर जोर दे चुकी है कि बिना ठोस आधार के दायर याचिकाएं न्यायपालिका पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जनहित याचिकाओं (PIL) का दायरा सीमित किया जाना चाहिए, ताकि केवल गंभीर और तथ्यात्मक मामलों पर ही अदालत का समय खर्च हो।

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