मनोरंजन | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 8 अक्टूबर 2026
नाना पाटेकर के निधन ने हिंदी सिनेमा को भीतर तक झकझोर दिया है। 75 साल की उम्र में उनके जाने की खबर के बाद फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियां उन्हें याद कर रही हैं। लेकिन अभिनेता शाहरुख खान की श्रद्धांजलि में सिर्फ एक सहकर्मी के जाने का दुख नहीं, बल्कि एक ऐसे दोस्त, गुरु और आलोचक की कमी का दर्द दिखाई दिया, जिसने उनके शुरुआती करियर में उन्हें एक बेहद अहम बात समझाई थी।
शाहरुख खान ने गुरुवार शाम सोशल मीडिया पर नाना पाटेकर के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा करते हुए भावुक संदेश लिखा। उन्होंने 1992 की फिल्म ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ के दिनों को याद किया। यही वह फिल्म थी जिसमें शाहरुख और नाना ने पहली बार साथ काम किया था।
शाहरुख ने बताया कि नाना से पहली मुलाकात के दौरान वह घबराहट और उत्साह में अपने बाल ठीक कर रहे थे। नाना ने उनका हाथ हटाते हुए उनसे कहा था—‘हीरो की तरह बाल मत बना… तू एक्टर है।’ शाहरुख के लिए नाना की यह बात सिर्फ उस पल की डांट नहीं थी। उनके मुताबिक, वह एक ऐसी सीख थी जो उनके साथ लंबे समय तक रही।
नाना पाटेकर की खासियत ही यही थी कि वह सामने वाले को खुश करने के लिए बातें नहीं करते थे। शाहरुख ने उन्हें याद करते हुए लिखा कि नाना कभी वह नहीं कहते थे जो सामने वाला सुनना चाहता था, बल्कि वही कहते थे जो उसे सुनना जरूरी होता था। सीधे, बेबाक और कभी-कभी बेहद सख्त—लेकिन उनके भीतर एक बेहद खूबसूरत और संवेदनशील इंसान भी था।
शाहरुख ने नाना के स्नेह के अनोखे अंदाज को भी याद किया। उन्होंने लिखा कि नाना पहले डांटते थे और कभी-कभी लगातार तीन-चार बातें सुना देते थे, लेकिन बाद में एहसास होता था कि उस सख्ती के पीछे उनका अपनापन छिपा था। शाहरुख ने साफ शब्दों में कहा कि नाना उनसे प्यार करते थे और वह भी नाना से बेहद प्यार करते थे।
शाहरुख के लिए नाना केवल एक वरिष्ठ अभिनेता नहीं थे। उन्होंने उन्हें अपना मेंटोर, शिक्षक, आलोचक और दोस्त बताया। दोनों के बीच फिल्मों के अलावा निजी दोस्ती भी थी। शाहरुख ने खास तौर पर उनके साथ कैरम खेलने का जिक्र किया और बताया कि नाना लगातार बाजियां जीतते थे और अपनी जीत का भरपूर आनंद लेते थे।
यही वजह है कि नाना के जाने का दर्द शाहरुख के शब्दों में बेहद व्यक्तिगत दिखाई देता है। उन्होंने लिखा कि काश उनके पास नाना के साथ कुछ और बातचीत करने का समय होता। काश एक और बहस होती, एक और कप चाय साथ पी जाती और कैरम का एक और खेल खेला जाता।
लेकिन इस पूरे संदेश में सबसे ज्यादा भावुक करने वाली बात वह सीख है जिसे शाहरुख ने नाना की सबसे बड़ी विरासत के तौर पर याद किया—‘हीरो बनने के चक्कर में एक्टर मत खोना।’
शाहरुख ने लिखा कि नाना की तीव्रता, उनकी हंसी, उनका पागलपन और उनका प्यार हमेशा उनके साथ रहेगा। उन्होंने कहा कि नाना ने सिर्फ सिनेमा की दुनिया में नहीं, बल्कि देशभर के लोगों के दिलों में एक खालीपन छोड़ दिया है।
नाना और शाहरुख ने ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ के बाद 2002 में ‘शक्ति: द पावर’ में भी साथ काम किया था। यही उनकी आखिरी फिल्म थी।
नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर को गोवा में कार्डियक अरेस्ट के बाद हुआ। उनके निधन की खबर से सिनेमा जगत में शोक की लहर है। एक ऐसे अभिनेता का सफर थम गया, जिसने पर्दे पर सिर्फ किरदार नहीं निभाए, बल्कि उन्हें अपनी आवाज, अपने तेवर और अपनी पूरी आत्मा दी।
शाहरुख खान की श्रद्धांजलि में शायद इसी रिश्ते की सबसे सच्ची तस्वीर दिखाई देती है—एक महान अभिनेता दूसरे महान अभिनेता को याद कर रहा है और उस इंसान की एक पुरानी सीख को अपने दिल में हमेशा के लिए संभाल लेने का वादा कर रहा है।
‘हीरो बनने के चक्कर में एक्टर मत खोना।’
नाना की यह बात शायद सिर्फ शाहरुख खान के लिए नहीं थी। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक ऐसी सीख है, जो उनके जाने के बाद और ज्यादा गूंजती रहेगी।



