राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 10 अक्टूबर 2026
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री परवेश वर्मा को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि शिकायत के मामले में अदालत से झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने शनिवार को उनकी शिकायत खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया पर सौरभ भारद्वाज की ओर से की गई संबंधित टिप्पणियां सवालों के रूप में रखी गई थीं और उन्हें मानहानिकारक मानने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। यह मामला एक नाबालिग से जुड़े यौन उत्पीड़न के प्रकरण को लेकर सोशल मीडिया पर सौरभ भारद्वाज की टिप्पणियों से संबंधित था। परवेश वर्मा ने इन टिप्पणियों को लेकर आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।
अदालत के फैसले का अर्थ है कि इस शिकायत के आधार पर सौरभ भारद्वाज के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू नहीं होगी। अदालत ने टिप्पणियों की प्रकृति पर विचार करते हुए पाया कि उन्हें सीधे आरोप के बजाय सवालों के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इसी आधार पर शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार किया गया।
सवाल पूछना मानहानि नहीं: अदालत के फैसले का अहम पहलू
इस मामले में अदालत का महत्वपूर्ण निष्कर्ष टिप्पणियों की भाषा और उनके स्वरूप से जुड़ा है। सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के बयान और सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियां कई बार राजनीतिक विवाद का कारण बनती हैं। लेकिन किसी बयान को मानहानिकारक मानने के लिए केवल उसके विवादास्पद होने का आधार पर्याप्त नहीं होता; उसके संदर्भ और प्रकृति पर भी विचार करना पड़ता है।
इस मामले में अदालत ने माना कि सौरभ भारद्वाज की टिप्पणियां सवालों के रूप में थीं और शिकायत के आधार पर संज्ञान लेने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। हालांकि, इस आदेश को हर प्रकार के सवाल या सोशल मीडिया टिप्पणी के लिए मानहानि से सामान्य छूट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फैसला इसी शिकायत और उसके सामने रखी गई सामग्री के संदर्भ में है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच अदालत का फैसला
दिल्ली की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं। ऐसे माहौल में सोशल मीडिया पर दिए गए बयानों को लेकर कानूनी विवाद भी सामने आते रहे हैं। इस मामले में अदालत का फैसला एक बार फिर यह स्पष्ट करता है कि किसी टिप्पणी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज करा देना अपने आप में अदालत की ओर से संज्ञान लिए जाने की गारंटी नहीं है।
फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्ट में परवेश वर्मा की ओर से इस फैसले के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई किए जाने की जानकारी नहीं दी गई है। अदालत के आदेश का प्रभाव शिकायत पर संज्ञान लेने तक सीमित है; इसे मामले से जुड़े सभी संभावित तथ्यों या किसी अन्य कानूनी प्रश्न पर व्यापक निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
निष्कर्ष: दिल्ली के उपमुख्यमंत्री परवेश वर्मा की शिकायत खारिज होने से सौरभ भारद्वाज को इस मामले में राहत मिली है। अदालत ने टिप्पणियों को सवालों के रूप में देखते हुए आपराधिक मानहानि की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।



