अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो 5 नवंबर 2025
सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत और विविध बनाने के लिए अब खनन (माइनिंग) क्षेत्र पर जोर दे रहा है। इसी दिशा में सरकार ने 12 स्थानीय और विदेशी कंपनियों को नए खनिज खोजने की अनुमति दी है। इन कंपनियों को कुल 38 लाइसेंस मिलेंगे और वे लगभग 664 मिलियन सऊदी रियाल (करीब 180 मिलियन डॉलर) खर्च करके जमीन की गहराई में छिपे खजाने को खोजेंगी। सरकार का मानना है कि तेल और पेट्रोलियम के बाद खनन को देश की अर्थव्यवस्था का तीसरा बड़ा आधार बनाया जा सकता है।
सरकार का अनुमान है कि सऊदी अरब की जमीन में 9.37 ट्रिलियन रियाल यानी अरबों-खरबों रुपये के खनिज मौजूद हैं। इन्हें खोजकर और निकालकर देश करोड़ों रोजगार और अरबों की कमाई कर सकता है। इसी वजह से सरकार तेजी से सर्वे और ड्रिलिंग को बढ़ा रही है। नए प्रोजेक्ट लगभग 3,000 वर्ग किलोमीटर के बड़े इलाके में चलेंगे, जहाँ जमीन में 7 लाख 52 हजार मीटर से अधिक ड्रिलिंग, भूगर्भीय सर्वे और मिट्टी-पत्थर के हजारों नमूने लिए जाएंगे।
इन योजनाओं से स्थानीय रोजगार भी बढ़ेगा। अभी की जानकारी के अनुसार 63 लोग सीधे इन परियोजनाओं में काम करेंगे — जिनमें 27 सऊदी नागरिक हैं और बाकी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ। साथ ही इन कंपनियों ने खर्च का लगभग 43 प्रतिशत पैसा देश के अंदर ही खर्च किया है, जिससे सऊदी की अर्थव्यवस्था को फायदा हो रहा है।
सरकार ने पिछली बार इस कार्यक्रम में शामिल कंपनियों के लिए भी मदद बढ़ाई है। 2024 के पहले चरण में जिन कंपनियों ने हिस्सा लिया था, वे नवंबर 2025 तक अपनी लागत का कुछ हिस्सा वापस पाने के लिए आवेदन कर सकती हैं। सरकार इस कार्यक्रम के तहत एक लाइसेंस पर 7.5 मिलियन रियाल तक वित्तीय सहायता दे रही है, ताकि शुरुआती जोखिम कम हों।
यह पहल खास तौर पर तांबा, लिथियम, निकेल, सोना और लोहे जैसे महत्वपूर्ण खनिजों को खोजने पर केंद्रित है। ये खनिज इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ, बैटरी, मोबाइल, कंप्यूटर, रोबोट और भविष्य की ऊर्जा तकनीकों के लिए बहुत जरूरी हैं। इसलिए दुनिया भर में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। सऊदी अरब चाहता है कि इस मांग का बड़ा हिस्सा वह खुद पूरा करे और वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत भूमिका बनाए।
सरकार ने कहा है कि इस कार्यक्रम का तीसरा चरण जनवरी 2026 में रियाद में होने वाले फ्यूचर मिनरल्स फोरम में शुरू किया जाएगा। तब खोज का दायरा और भी बढ़ाया जाएगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ रणनीतिक खनिज ज्यादा पाए जाते हैं। इससे आने वाले वर्षों में सऊदी अरब माइनिंग हब बन सकता है।




