अवधेश कुमार | नई दिल्ली 5 जनवरी 2026
भारत की विदेश नीति को लेकर कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार पर बड़ा और तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। मुद्दा है—भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद में कथित कटौती और इसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों से जोड़कर देखा जाना। कांग्रेस ने ट्रंप के उस बयान का हवाला दिया है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि “भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया क्योंकि मोदी मुझे खुश करना चाहते हैं। अगर मेरी बात नहीं मानी गई तो मैं टैरिफ बढ़ा दूंगा।” कांग्रेस का कहना है कि अगर यह दावा सही है, तो यह भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पार्टी का आरोप है कि मोदी सरकार ने अब तक इस पूरे मामले पर कोई स्पष्ट और ठोस जवाब नहीं दिया है। कांग्रेस पूछ रही है कि क्या भारत जैसे बड़े और आत्मनिर्भर देश की विदेश नीति अब वॉशिंगटन के दबाव में तय हो रही है? क्या रूस से तेल खरीदना इसलिए रोका गया क्योंकि अमेरिका ने टैरिफ की धमकी दी?
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि ट्रंप एक तरफ कभी सीजफायर कराने का श्रेय लेते हैं, तो दूसरी तरफ रूस से तेल खरीदने पर रोक लगाने की धमकी देते हैं। ऐसे में मोदी सरकार की चुप्पी क्या कमजोरी नहीं दर्शाती? पार्टी का कहना है कि इस कथित दबाव का खामियाजा देश क्यों भुगत रहा है—महंगे ईंधन, बढ़ती महंगाई और कमजोर मोलभाव की स्थिति के रूप में।
सुप्रिया श्रीनेत ने साफ शब्दों में कहा कि “नरेंद्र मोदी चुप्पी तोड़िए, जवाब दीजिए। देश जानना चाहता है कि क्या रूस से तेल खरीदने का फैसला भारत के हित में बदला गया या ट्रंप को खुश करने के लिए?”
कांग्रेस का आरोप है कि मजबूत नेतृत्व का दावा करने वाली सरकार आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर सवालों के घेरे में है। पार्टी ने दो टूक कहा है कि अगर फैसले भारत के हित में हैं, तो सरकार तथ्यों के साथ सामने आए, और अगर दबाव में लिए गए हैं, तो देश को सच्चाई बताई जाए।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या भारत की विदेश नीति स्वतंत्र निर्णयों पर आधारित है या फिर वैश्विक शक्तियों के दबाव में डगमगा रही है। कांग्रेस के हमले के बाद अब सबकी निगाहें मोदी सरकार के जवाब पर टिकी हैं।




