आलोक कुमार। नई दिल्ली 30 नवंबर 2025
शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में केंद्र सरकार ने साफ संकेत दे दिया कि वह इस बार संसद के सुचारु संचालन पर कोई समझौता नहीं चाहती। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार चाहती है कि सदन बिना किसी व्यवधान के चले और सभी दल आपसी संवाद के जरिए महत्वपूर्ण विधायी एजेंडा आगे बढ़ने दें। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार विपक्ष समेत सभी दलों के साथ निरंतर बातचीत के लिए तैयार है और संसद की कार्यवाही बाधित करने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों के खिलाफ है। उनके इस बयान को संसद के भीतर हाल के वर्षों में बढ़ती राजनीतिक तल्खी और लगातार स्थगन के बीच एक बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
विपक्ष की ओर से उठाई गई SIR (Special Intensive Revision) से जुड़ी चर्चा की मांग पर रिजिजू ने कहा कि सत्र का अंतिम एजेंडा बिज़नेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) तय करेगी, जिसकी बैठक रविवार शाम को होगी। यह संकेत देता है कि SIR को सत्र के दौरान चर्चा के लिए रखा जाए या नहीं—इस पर अंतिम निर्णय BAC की सहमति से होगा। विपक्ष विशेष रूप से मतदाता सूची में अनियमितता, समय-सीमा विस्तार और संभावित गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर दबाव डाल रहा है। वहीं सरकार का रुख यह है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और वह अपने अधिकार क्षेत्र में काम कर रहा है, इसलिए संसद में इसे लेकर अनावश्यक टकराव पैदा नहीं किया जाना चाहिए।
बैठक में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा, कई क्षेत्रीय दलों के नेता और विपक्षी गठबंधन के प्रतिनिधि शामिल हुए। सरकार ने विपक्ष को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि वह किसी भी मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है—बशर्ते सदन को रोकने, हंगामा करने और गर्जन-धमकी वाले माहौल से परहेज किया जाए। सूत्रों के अनुसार, सत्र में कई अहम विधेयक, आर्थिक सुधारों से जुड़े संशोधन और सुरक्षा से संबंधित नए बिल पेश किए जा सकते हैं, जिसके लिए सरकार संसद के अधिकतम समय का उपयोग चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी महीनों में होने वाले महत्वपूर्ण चुनावों और राष्ट्रीय मुद्दों की तीखी ध्रुवीकरण वाली राजनीति को देखते हुए यह सत्र बेहद संवेदनशील होगा। विपक्ष SIR, मंहगाई, बेरोजगारी, बाहरी कर्ज, और हालिया राजनीतिक विवादों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपने ‘विकसित भारत’ एजेंडा के तहत सुधारवादी बिलों को पारित कराने के लिए रणनीति बना रही है। ऐसे में सर्वदलीय बैठक का मूल संदेश—संवाद से समाधान—सत्र के संचालन की राह तय करने वाला अहम संकेत माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, संसद का यह शीतकालीन सत्र राजनीतिक टकराव, रणनीतिक गठजोड़, बहसों और कई नए तथा महत्वपूर्ण विधेयकों के बीच एक बेहद ऊर्जावान और निर्णायक दौर साबित होने की ओर बढ़ रहा है। Whether Parliament walks into conflict or consensus—इसका पहला संकेत BAC की बैठक से मिल सकता है।





