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सीज़फायर पर लौटें, हॉर्मुज खोलें: ब्रिटेन के PM स्टारमर की अमेरिका-ईरान से अपील

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | लंदन/वॉशिंगटन | 9 जुलाई 2026

अमेरिका और ईरान के बीच फिर से भड़के सैन्य तनाव के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने दोनों देशों से तुरंत युद्धविराम की प्रक्रिया में लौटने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए हुए समझौते को लागू करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मौजूदा हालात केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं।

स्टारमर ने कहा कि क्षेत्र में लगातार बढ़ते सैन्य हमले किसी भी पक्ष के हित में नहीं हैं। उनका मानना है कि तनाव कम करने का एकमात्र रास्ता बातचीत और कूटनीति है। उन्होंने अमेरिका और ईरान से आग्रह किया कि वे तत्काल संघर्ष विराम का सम्मान करें और उस समझौते को फिर से प्रभावी बनाएं जिसके तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जानी थी।

दरअसल, पिछले कुछ दिनों में हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कई व्यापारिक और तेल टैंकरों पर हमले हुए हैं। इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रीय हितों को निशाना बनाया। इस घटनाक्रम के चलते दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) के बड़े हिस्से की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो तेल और गैस की कीमतों में तेज़ उछाल आ सकता है। इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप सहित ऊर्जा आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा तनाव जल्द समाप्त नहीं हुआ तो वैश्विक सप्लाई चेन फिर से प्रभावित हो सकती है। बीमा कंपनियां समुद्री जहाजों का प्रीमियम बढ़ा सकती हैं, माल ढुलाई महंगी हो सकती है और ऊर्जा संकट गहरा सकता है। इससे महंगाई बढ़ने और वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

ब्रिटेन की अपील ऐसे समय आई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ईरान पर कड़े सैन्य हमलों की चेतावनी दी थी, हालांकि बाद में उन्होंने संकेत दिया कि यदि हालात नियंत्रित होते हैं तो संघर्ष अधिक समय तक नहीं चलेगा। दूसरी ओर, ईरान लगातार कह रहा है कि यदि उस पर हमले जारी रहे तो वह जवाबी कार्रवाई करता रहेगा।

इस बीच संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, कतर और कई अन्य देशों ने भी दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया में फैल सकता है और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का संदेश साफ है—अब समय सैन्य टकराव बढ़ाने का नहीं, बल्कि कूटनीति को मौका देने का है। यदि अमेरिका और ईरान फिर से युद्धविराम पर सहमत होते हैं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से खोल दिया जाता है, तो इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव कम होगा बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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