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आरक्षण खतरे में! प्रकाश अंबेडकर ने छेड़ी सामाजिक न्याय की लहर

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डॉ. बी.आर. अंबेडकर के पोते प्रकाश राज अंबेडकर ने बड़ा ऐलान किया है। वह वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के प्रमुख हैं। उन्होंने नांदेड़ में एक बड़ी सभा को संबोधित किया। यह सभा ‘भटके विमुक्त बलुतेदार ओबीसी एल्गार महामोर्चा’ थी। अंबेडकर ने कहा कि देश में आरक्षण खतरे में है। उन्होंने नई सामाजिक न्याय की लहर उठाने का आह्वान किया है। यह मुद्दा फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आ गया है।

मंडल की याद और 40 साल का संघर्ष

प्रकाश अंबेडकर ने इस दौरान अपनी बात भावुक अंदाज़ में रखी। उन्होंने बताया कि वह लगभग 40 सालों से ओबीसी आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने वी.पी. सिंह को याद किया। वी.पी. सिंह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री थे। 1990 में उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की थीं।

अंबेडकर ने कहा कि तब सामाजिक न्याय की एक मज़बूत लहर उठी थी। उन्होंने कहा कि उस समय आरक्षण विरोधी ताकतें डर गई थीं। वह दौर सामाजिक क्रांति का था। उस क्रांति ने वंचितों को अधिकार और आत्मसम्मान दिया। अंबेडकर ने कहा कि आज फिर वैसी ही लहर की ज़रूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के स्तर पर आरक्षण पर हमला हो रहा है।

उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण को साजिश के तहत कमजोर किया जा रहा है। ये साज़िश नौकरशाही और राजनीति के ज़रिए हो रही है। उन्होंने ओबीसी जनगणना की मांग की।

अंबेडकर ने कहा कि जनगणना के बिना सही आंकड़े सामने नहीं आएंगे। तब आरक्षण का दायरा सिमटता जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें जनगणना से बच रही हैं। यह आरक्षण को खत्म करने की एक योजना है। उन्होंने साफ कहा कि आरक्षण सामाजिक बराबरी के लिए है। यह संविधान की आत्मा है। अगर यह छीना गया, तो असमानता की खाई और बड़ी होगी।

 नांदेड़ में ओबीसी एकजुटता

नांदेड़ की सड़कों पर हज़ारों की भीड़ जमा थी। लोगों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं। भीड़ “जय भीम” और “सामाजिक न्याय जिंदाबाद” के नारे लगा रही थी। प्रमुख ओबीसी नेता लक्ष्मण हाके मंच पर मौजूद थे। नवनाथ वाघमारे और कई समुदायों के प्रतिनिधि भी साथ थे।

वक्ताओं ने कहा कि ओबीसी समाज निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार है। यह संघर्ष संविधान-संरक्षित हकों के लिए होगा। कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया। वे आरक्षण बचाने के लिए लड़ेंगे। आंदोलन तब तक चलेगा जब तक शिक्षा, नौकरी और राजनीति में समान हिस्सेदारी नहीं मिल जाती।

1990 की लहर फिर से चाहिए

अंबेडकर ने कहा कि देश में 1990 जैसी लहर फिर उठनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यह समय आराम करने का नहीं है। उन्होंने संगठित विरोध करने को कहा। ओबीसी, दलित, आदिवासी और सभी वंचित वर्गों को एक होना होगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण उनके अस्तित्व की गारंटी है। इसे कमजोर करना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ होगा। अंबेडकर ने कहा कि खतरा केवल कानून से नहीं है। यह उस मानसिकता से है जो समानता से डरती है। उन्होंने लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की। उन्होंने संविधान की रक्षा के लिए जनजागरण करने को कहा।

आरक्षण की रक्षा, संविधान की रक्षा

प्रकाश अंबेडकर का बयान महत्वपूर्ण समय पर आया है। देश में जाति-आधारित जनगणना पर तीखी बहस चल रही है। उनका बयान ओबीसी समाज की चिंता को दिखाता है। यह संकेत है कि भारत में सामाजिक न्याय की अगली लड़ाई शुरू हो चुकी है। यह मोर्चा केवल राजनीतिक नहीं है। यह भारत को समानता की दिशा में ले जाने वाली विचारधारा को फिर से स्थापित करता है।

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