नई दिल्ली, 31 अक्तूबर 2025
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी किया है। अदालत ने ईडी से कहा है कि वह 10 दिनों के भीतर इस पूरे मामले पर जवाब दाखिल करे।
यह मामला छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत शुरू की थी। आरोप है कि इस घोटाले में 2000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई हुई, जिसका हिस्सा कथित तौर पर शेल कंपनियों और रियल एस्टेट निवेशों के जरिये सफेद किया गया।
चैतन्य बघेल की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि ईडी ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कई कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया, जिससे उनकी गिरफ्तारी अवैध और असंवैधानिक ठहरती है। इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि जांच एजेंसी की कार्रवाई में कुछ प्रक्रियागत त्रुटियां हो सकती हैं, परंतु उसे पूरी तरह अवैध नहीं कहा जा सकता।
अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ईडी से जवाब मांगते हुए साफ संकेत दिया है कि शीर्ष न्यायालय इस गिरफ्तारी और ईडी की कार्यप्रणाली को गंभीरता से परखना चाहता है। अदालत ने कहा है कि जवाब मिलने के बाद यह तय किया जाएगा कि आगे सुनवाई कैसे होगी और क्या गिरफ्तारी को चुनौती देने वाले पक्ष के तर्कों पर विस्तृत विचार किया जाएगा।
यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ा हुआ है। ईडी का कहना है कि उसके पास पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जबकि चैतन्य बघेल पक्ष का दावा है कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है।
सुप्रीम कोर्ट के इस नोटिस के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में फिर हलचल मच गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईडी किस तरह से अपने जवाब में गिरफ्तारी का बचाव करती है — और क्या अदालत इस गिरफ्तारी को वैध ठहराती है या मामले की दोबारा जांच की राह खोलती है।




