राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 10 अक्टूबर 2026
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले नेताओं, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने पर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मौजूदा हालात को “अघोषित आपातकाल” बताते हुए चेतावनी दी कि यदि रविवार तक हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा नहीं किया गया, तो वह दोबारा अनशन या पदयात्रा करने पर विचार कर सकते हैं।
वांगचुक ने शनिवार को छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासत पर चिंता जताई। दिल्ली में सीजेपी के प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा था। प्रदर्शन से पहले कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। इनमें अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के नाम शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही तय करने की है।
वांगचुक ने शुक्रवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि वह दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल नहीं हो पाएंगे। हालांकि, उन्होंने आंदोलन से जुड़े नेताओं और युवाओं के लिए संदेश जारी किया। उन्होंने प्रसिद्ध शायर फैज अहमद फैज की पंक्तियों को अपने अंदाज में उद्धृत करते हुए कहा, “और भी ग़म हैं ज़माने में सियासत के सिवा, राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा।” इसके साथ उन्होंने अलग-अलग समूहों के नेताओं से एकजुट रहने और राजनीतिक परिपक्वता दिखाने की अपील की।
वांगचुक ने खास तौर पर युवाओं से हर परिस्थिति में शांतिपूर्ण बने रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जून में जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी के अहिंसा के संदेश को सामने रखने की कोशिश की थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि युवा उस रास्ते से नहीं भटकेंगे। उनके मुताबिक, विरोध के दौरान शांति बनाए रखना आंदोलन की जिम्मेदारी है और युवाओं को किसी भी उकसावे के बावजूद अहिंसक तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए।
दिल्ली में हिरासत की कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब सीजेपी और उससे जुड़े समूह मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष के कुछ नेताओं ने भी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है। हालांकि, चुनावी गड़बड़ी से जुड़े आरोपों और प्रशासन की कार्रवाई पर अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दावे हैं।
वांगचुक की चेतावनी से अब इस विवाद में एक और सवाल जुड़ गया है—क्या हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई के बाद तनाव कम होगा, या आंदोलन और व्यापक रूप लेगा? फिलहाल, वांगचुक ने तत्काल रिहाई की मांग करते हुए अनशन या पदयात्रा की संभावना खुली रखी है। उन्होंने साथ ही शांतिपूर्ण विरोध और नेताओं के बीच एकता को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है।



