वसीम अकरम | नई दिल्ली 17 नवंबर
दिल्ली में लाल किला के पास हुए हालिया ब्लास्ट मामले में जांच एक अहम मोड़ पर पहुँची है। शुरुआती संदेहों के आधार पर हिरासत में लिए गए तीन डॉक्टर और एक फर्टिलाइज़र व्यापारी को जांच एजेंसियों ने गहन पूछताछ के बाद पूरी तरह निर्दोष पाते हुए रिहा कर दिया है। यह कदम न केवल इस केस की दिशा बदलता है बल्कि उन अफवाहों और आशंकाओं को भी शांत करता है जो इन लोगों की गिरफ्तारी के बाद फैलने लगी थीं।
जांच में जुटी एजेंसियों ने साफ बताया कि हिरासत में लिए गए डॉक्टर—डॉ. रेहान, डॉ. मोहम्मद और डॉ. मुस्तकीम—का ब्लास्ट मामले के मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आपराधिक संबंध नहीं पाया गया है। ये सभी तीनों हरियाणा के नूह जिले में मेडिकल प्रैक्टिस से जुड़े लोग हैं, जिनके खिलाफ प्रारंभिक आधार पर कुछ संदेह उत्पन्न हुए थे, परंतु जांच के दौरान उनके न तो किसी आतंकी षड्यंत्र में शामिल होने के सबूत मिले, न ही मुख्य आरोपी से किसी प्रकार के संपर्क का प्रमाण।
इसी तरह फर्टिलाइज़र व्यापारी दिनेश सिंगला को भी संदेह के दायरे में लाया गया था, लेकिन जांच अधिकारियों के अनुसार उनके व्यावसायिक लेन-देन और मुख्य आरोपी के बीच कोई ऐसा लिंक नहीं मिला जो किसी आपराधिक गतिविधि या षड्यंत्र की ओर संकेत करता हो। दिनेश के विरुद्ध उठे प्रारंभिक सवालों की भी जांच में पुष्टि नहीं हुई, जिसके बाद उन्हें बिना किसी आरोप के रिहा कर दिया गया।
गिरफ्तारी हरियाणा के नूह से की गई थी, जिसने पूरे क्षेत्र में चिंता और तनाव का माहौल पैदा कर दिया था। मेडिकल समुदाय ने इन गिरफ्तारियों पर पहले ही चिंता जताई थी, क्योंकि तीनों डॉक्टरों का स्थानीय स्तर पर अच्छा रिकॉर्ड और सामाजिक प्रतिष्ठा रही है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद अब उनकी रिहाई से क्षेत्र में फैल रही बेचैनी काफी हद तक शांत हुई है।
जांच एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फिलहाल मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी के नेटवर्क और संपर्कों की अलग से जांच जारी है और यह रिहाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जांच टीम बिना किसी पूर्वाग्रह और अत्यधिक सावधानी के साथ काम कर रही है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि यह केस बेहद संवेदनशील है और दिल्ली जैसे उच्च-सुरक्षा क्षेत्र में ब्लास्ट होने के कारण जांच के दौरान हर संदिग्ध कड़ी की तहकीकात करना जरूरी था।
इस रिहाई ने एक बार फिर यह प्रश्न सामने रखा है कि संवेदनशील मामलों में शुरुआती गिरफ्तारियाँ कितनी सावधानी से हों और कितनी जल्दी पुलिस या जांच एजेंसियों को निष्कर्ष पर पहुँचना चाहिए। हालांकि, टीम का यह कदम यह भी दिखाता है कि गलत दिशा में गई किसी भी प्रक्रिया को सुधारने की तत्परता मौजूद है।
जांच जारी है और मुख्य आरोपी की पृष्ठभूमि, उद्देश्य और संभावित नेटवर्क की गहन पड़ताल की जा रही है। फिलहाल, चार निर्दोष लोगों की रिहाई से स्पष्ट हो गया है कि ब्लास्ट मामले में नेटवर्क की वास्तविक कड़ी अभी भी गहरी छानबीन की मांग करती है।





