मुंबई 24 अक्टूबर 2025
भारतीय क्रिकेट के करिश्माई कोच और कमेंटेटर रवि शास्त्री ने हाल ही में भारत के अब तक के टॉप 5 एकदिवसीय (ODI) बल्लेबाजों की सूची जारी की है, जिसने क्रिकेट जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। अपने विश्लेषण और गहरी क्रिकेट समझ के लिए प्रसिद्ध शास्त्री ने इस सूची में उन दिग्गजों को शामिल किया है जिन्होंने अलग-अलग युगों में भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया — तकनीक, निरंतरता, नेतृत्व और बड़े मौकों पर प्रदर्शन के आधार पर। इस चयन में जहाँ विराट कोहली को नंबर 1 पर रखा गया है, वहीं सचिन तेंदुलकर, कपिल देव, महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा जैसे नामों को भी शामिल किया गया है। यह सूची सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की आत्मा और उसकी निरंतरता की कहानी कहती है — एक ऐसी यात्रा जहाँ हर युग ने एक महान बल्लेबाज को जन्म दिया।
- विराट कोहली — निरंतरता का पर्याय और पीछा करने का सम्राट
विराट कोहली को रवि शास्त्री ने भारतीय क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ एकदिवसीय बल्लेबाज के रूप में चुना है — और यह चयन किसी आश्चर्य से कम नहीं। कोहली का करियर उस युग का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ आंकड़े और आक्रामकता दोनों बराबर महत्व रखते हैं। उन्होंने अब तक लगभग 14,181 रन बनाए हैं, औसत लगभग 57.88 की रही है — जो दर्शाता है कि वे हर पारी में टीम को एक मजबूत स्थिति में पहुँचाते हैं। उनके नाम 51 एकदिवसीय शतक दर्ज हैं, जो विश्व-रिकॉर्ड है।
कोहली को “चेज़ मास्टर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि जब भारत को लक्ष्य का पीछा करना होता है, तो उनका प्रदर्शन और निखर जाता है। आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने अपने अधिकांश शतक तब बनाए जब भारत दूसरी पारी में बल्लेबाजी कर रहा था। कोहली की बल्लेबाजी तकनीक क्लासिक और आधुनिक दोनों का मिश्रण है — कवर-ड्राइव में शान, फ्लिक में नज़ाकत और विकेटों के बीच दौड़ में बिजली-सी गति। रवि शास्त्री का कहना है कि “कोहली भारतीय क्रिकेट में मानसिक मजबूती और पेशेवर अनुशासन के प्रतीक हैं।” उनके नेतृत्व में भारत ने कई ऐतिहासिक सीरीज़ जीतीं, और बतौर बल्लेबाज, उन्होंने हर देश में रन बनाए।
- सचिन तेंदुलकर — भारतीय बल्लेबाजी की नींव और क्रिकेट का देवता
सचिन तेंदुलकर को दूसरे स्थान पर रखते हुए रवि शास्त्री ने उस पीढ़ी को सम्मान दिया है जिसने भारतीय क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। तेंदुलकर का नाम केवल क्रिकेट-इतिहास नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक है। उन्होंने 463 एकदिवसीय मैचों में 18,426 रन बनाए, औसत 44.83 रही, और उन्होंने 49 शतक जमाए। यह आंकड़े उस दौर के हैं जब न तो टी-20 का प्रभाव था, न पिचें इतनी बल्लेबाज-अनुकूल थीं।
सचिन के खेल की खासियत थी — धैर्य और निरंतरता। उन्होंने शुरुआती 90 के दशक में पाकिस्तान के तूफ़ानी गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक अंदाज़ में रन बनाए, और फिर ऑस्ट्रेलिया व साउथ अफ्रीका जैसी टीमों के सामने क्लासिक बल्लेबाजी दिखाई। उनकी 200* की ऐतिहासिक पारी (दुनिया का पहला दोहरा शतक एकदिवसीय में) आज भी प्रेरणा है। 2011 विश्व कप में उनका योगदान, 2003 में उनकी सेमीफाइनल पारी, या 1998 में शारजाह का “डेज़र्ट स्टॉर्म” — सब क्रिकेट-प्रेमियों की स्मृतियों में अंकित हैं। सचिन सिर्फ रन नहीं बनाते थे, बल्कि उम्मीद जगाते थे कि भारत किसी भी मैच में जीत सकता है।
- कपिल देव — नेतृत्व, संघर्ष और सर्वांगीण प्रतिभा की मिसाल
तीसरे स्थान पर कपिल देव का चयन इस सूची को संतुलन देता है। वो सिर्फ बल्लेबाज नहीं, बल्कि ऐसे ऑल-राउंडर थे जिन्होंने भारतीय क्रिकेट की रीढ़ मजबूत की। कपिल देव ने एकदिवसीय प्रारूप में 225 मैच खेले, 3,783 रन बनाए और 253 विकेट हासिल किए। बल्लेबाजी औसत 23.79, और गेंदबाजी औसत लगभग 27.45 रही। इन आंकड़ों से अधिक अहम उनका प्रभाव था — वो मैदान पर “एनर्जी” थे, टीम में आत्मविश्वास भरने वाले कप्तान।
1983 विश्व कप की जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि थी — और उसका चेहरा कपिल देव ही थे। जिम्बाब्वे के खिलाफ उनकी 175 रन की अविश्वसनीय पारी* ने भारत को हार से निकालकर जीत की राह दिखाई। वो न सिर्फ तेज़ गेंदबाजी में स्विंग लाते थे, बल्कि बल्ले से भी टीम को संकट से निकालते थे। रवि शास्त्री के अनुसार, “कपिल ने भारतीय क्रिकेट को आत्मसम्मान और आक्रामकता सिखाई।” उनका योगदान सिर्फ आंकड़ों में नहीं मापा जा सकता, बल्कि भारतीय टीम की आत्मा में महसूस किया जा सकता है।
- महेंद्र सिंह धोनी — शांत तूफान और मैच फिनिशर का पर्याय
चौथे स्थान पर एम.एस. धोनी हैं — वो कप्तान जिन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। 347 एकदिवसीय मैचों में 10,599 रन बनाना, औसत 50.23 के साथ, और साथ ही 256 कैच तथा 38 स्टंपिंग करना — धोनी के बहुमुखी कौशल को दिखाता है।
धोनी की पहचान उनकी “फिनिशिंग” क्षमता से होती है। 2011 विश्व कप फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ उनका 91* रन का प्रदर्शन आज भी हर भारतीय को याद है — जब उन्होंने अंतिम छक्का मारकर भारत को 28 साल बाद विश्व कप दिलाया। वो कप्तान जिन्होंने भारत को टी-20 वर्ल्ड कप (2007), चैम्पियंस ट्रॉफी (2013) और एकदिवसीय विश्व कप (2011) — तीनों दिलाए। मैदान पर उनका धैर्य, निर्णय-क्षमता और “कूल-हेड” रवैया उन्हें बाकी सब से अलग बनाता है। रवि शास्त्री ने सही कहा — “धोनी वो कप्तान हैं जो कभी डरते नहीं, और वो बल्लेबाज जो कभी हार नहीं मानते।”
- रोहित शर्मा — आधुनिक युग का विस्फोटक शिल्पकार
रवि शास्त्री की सूची में पाँचवें स्थान पर हैं — हिटमैन, रोहित शर्मा। आधुनिक एकदिवसीय क्रिकेट में रोहित ने बल्लेबाजी को एक नया आयाम दिया है। उनके नाम 11,249 रन हैं, औसत 48.69, और सबसे खास — तीन दोहरे शतक, जो अब तक किसी और बल्लेबाज के नाम नहीं हैं। उनकी सबसे बड़ी पारी 264 रन की है, जो आज भी विश्व-रिकॉर्ड है।
रोहित की बल्लेबाजी शैली तकनीक और टाइमिंग का अनोखा मिश्रण है। जब वो सेट हो जाते हैं, तो गेंदबाजों के लिए कोई राह नहीं बचती। उन्होंने 2019 विश्व कप में 5 शतक लगाए, जो किसी भी खिलाड़ी द्वारा एक ही टूर्नामेंट में सबसे अधिक हैं। उनकी कप्तानी में भारत ने कई द्विपक्षीय सीरीज़ जीती हैं, और वह इस पीढ़ी के “सचिन-कोहली के बीच का सेतु” कहे जा सकते हैं। रवि शास्त्री के शब्दों में — “रोहित बल्लेबाजी नहीं करते, वो संगीत बजाते हैं — लेकिन जब वो लय में आते हैं, तो विपक्षी टीम सन्नाटे में चली जाती है।”
आँकड़ों से परे महानता का प्रतीक
रवि शास्त्री की यह सूची न केवल संख्याओं पर आधारित है, बल्कि उस मानसिक और भावनात्मक शक्ति पर भी जो इन पाँच खिलाड़ियों में झलकती है।
- कोहली ने निरंतरता और पेशेवरता से आधुनिक क्रिकेट की परिभाषा बदली।
- सचिन ने भारतीय क्रिकेट को वैश्विक सम्मान दिलाया।
- कपिल ने आत्मविश्वास का युग शुरू किया।
- धोनी ने शांति और रणनीति से जीत की परंपरा बनाई।
- रोहित ने आधुनिक बल्लेबाजी को कला बना दिया।
इन पाँचों को मिलाकर अगर कोई “Team India Dream-XI” बनाई जाए, तो शायद उसे हराना किसी भी टीम के लिए असंभव हो।
ABC NATIONAL NEWS की राय :
रवि शास्त्री द्वारा चुने गए भारत के सर्वश्रेष्ठ पांच एकदिवसीय बल्लेबाजों की सूची पर एबीसी नेशनल न्यूज ने एक दिलचस्प और ठोस तर्क पेश करते हुए कहा है कि कपिल देव की जगह युवराज सिंह का नाम शामिल किया जाना चाहिए था, क्योंकि जब बात बल्लेबाजों की हो रही है तो बॉलिंग ऑलराउंडर नहीं बल्कि ऐसे बल्लेबाजी ऑलराउंडर की जरूरत है जो अपने दम पर मैच जिता सके — और इस कसौटी पर युवराज सिंह से बड़ा नाम भारतीय क्रिकेट में शायद ही कोई हो। कपिल देव की जिम्बाब्वे के खिलाफ 1983 विश्व कप में खेली गई 175 रनों की ऐतिहासिक पारी निस्संदेह क्रिकेट इतिहास की अमर गाथाओं में से एक है, लेकिन उसके बाद बल्लेबाजी के बल पर मैच जिताने वाली पारी का अभाव रहा है। इसके उलट युवराज सिंह ने अपने करियर में कई बार भारत को संकट से बाहर निकालकर जीत की राह दिखाई है।
चाहे वह 2002 का नेटवेस्ट सीरीज़ फाइनल हो जहां उन्होंने मोहम्मद कैफ के साथ मिलकर असंभव से दिखने वाले लक्ष्य को हासिल किया, या 2007 टी-20 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में छह छक्के मारने का ऐतिहासिक क्षण, या फिर 2011 विश्व कप का वह भावनात्मक अभियान जिसमें कैंसर से जूझते हुए भी युवराज ने बल्ले और गेंद दोनों से भारत को विश्व विजेता बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई। उनके एकदिवसीय करियर के आंकड़े उनकी प्रतिभा और योगदान की गवाही देते हैं — 304 मैचों में 36.55 की औसत से 8701 रन, 14 शतक और 52 अर्धशतक, साथ ही 111 विकेट।
2011 विश्व कप में युवराज सिंह को ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ घोषित किया गया, जहां उन्होंने 9 मैचों में 362 रन और 15 विकेट लेकर एकदिवसीय क्रिकेट में ऑलराउंड प्रदर्शन की परिभाषा ही बदल दी। उनकी बल्लेबाजी में गजब का संतुलन था — स्टाइल, स्ट्रोकप्ले, और संकट की घड़ी में ठहराव। उन्होंने सिर्फ रन नहीं बनाए, बल्कि मैच के प्रवाह को मोड़ा, टीम को प्रेरित किया, और हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के दिल में वह जगह बना ली जो सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बल्कि यादों से मापी जाती है। इसीलिए विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सचिन तेंदुलकर तकनीक के प्रतीक हैं, विराट कोहली स्थिरता के, और धोनी धैर्य के, तो युवराज सिंह भारतीय एकदिवसीय क्रिकेट की ‘जुनून और जीत की जिद’ के सबसे सशक्त प्रतीक हैं — और ऐसी शख्सियत को किसी भी ऑल-टाइम लिस्ट से बाहर रखना न केवल अन्याय बल्कि भारतीय क्रिकेट इतिहास के साथ नाइंसाफी है।




