हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HPSDMA) की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जून से 14 अगस्त तक मानसून सीजन में अब तक 247 लोगों की मौत हो चुकी है और 329 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 130 मौतें बारिश से संबंधित हादसों में और 117 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुईं।
सड़कें और यातायात ठप
प्रदेशभर में 455 सड़कें अवरुद्ध हैं, जिनमें तीन नेशनल हाईवे—एनएच-305, एनएच-05 और एनएच-707 शामिल हैं। कुल्लू सबसे ज़्यादा प्रभावित जिला है जहां 73 सड़कें बंद हैं, जबकि मंडी और शिमला में 58-58 सड़कें अवरुद्ध हैं। चंबा और कांगड़ा जिलों से भी कई सड़कें बंद होने की खबर है।
बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित
भारी बारिश के चलते 681 वितरण ट्रांसफार्मर (DTR) ठप हो गए हैं। कुल्लू और शिमला जिले बिजली आपूर्ति में सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इसके अलावा, राज्य भर में 182 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिनमें मंडी (58 योजनाएं), कांगड़ा और शिमला (41-41 योजनाएं) प्रमुख हैं।
मानव क्षति और हादसे
बारिश से हुई मौतों में सबसे ज्यादा 28 कांगड़ा, 26 मंडी और 13 हमीरपुर में दर्ज की गईं। इन मौतों में डूबने से 24, गिरने से 27 और भूस्खलन से 7 लोग मारे गए। वहीं सड़क हादसों में मंडी में 21, चंबा में 17 और शिमला में 15 लोगों की मौत हुई है।
प्रशासन अलर्ट पर
राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज़ कर दिए हैं। सेना और एनडीआरएफ की टीमें कई जगह तैनात की गई हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रभावित जिलों के अधिकारियों को हालात पर लगातार नज़र रखने और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।




