[the_ad id="179"]
Home » National » अंकिता भंडारी मामले पर राष्ट्रपति को राहुल गांधी की चिट्ठी, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग

अंकिता भंडारी मामले पर राष्ट्रपति को राहुल गांधी की चिट्ठी, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 अक्टूबर 2026

नई दिल्ली: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर सिक्किम के राज्यपाल पद पर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की मांग की है। राहुल गांधी ने आग्रह किया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल का पदभार ग्रहण नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंकिता के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद टूटने नहीं दी जानी चाहिए।

15 अक्टूबर 2026 को लिखे इस पत्र में राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी की हत्या, मामले में कथित VIP की पहचान को लेकर उठते सवालों और जारी CBI जांच का उल्लेख किया है। उन्होंने राष्ट्रपति से केंद्र सरकार को नियुक्ति पर दोबारा विचार करने की सलाह देने का अनुरोध किया है।

‘चार साल बाद भी सवाल—VIP कौन था?’

राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा कि 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के निकट वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य ने अंकिता पर VIP मेहमानों को ‘विशेष सेवाएं’ देने का दबाव बनाया था। राहुल गांधी के पत्र के अनुसार, अंकिता ने इससे इनकार किया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

राहुल गांधी ने कहा कि इस मामले में एक सवाल लंबे समय से अनुत्तरित है—आखिर वह VIP कौन था, जिसका उल्लेख मामले के संदर्भ में किया जाता रहा है? उन्होंने पत्र में लिखा कि उत्तराखंड में विरोध-प्रदर्शनों के बाद इस वर्ष जनवरी में राज्य सरकार ने इस सवाल की जांच CBI को सौंपी थी। उनके अनुसार, जांच अभी जारी है और इसकी गति धीमी है।

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि अंकिता के परिवार सहित कई लोग दुष्यंत गौतम को इस मामले से जोड़कर देखते हैं। इसी पृष्ठभूमि में उनकी सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर राहुल गांधी ने आश्चर्य और चिंता जताई है।

हालांकि, दुष्यंत गौतम के मामले से जुड़े होने संबंधी आरोपों को जांच के निष्कर्ष या न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पत्र में उठाए गए सवालों और आरोपों की पुष्टि के लिए CBI जांच के निष्कर्ष तथा संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।

राहुल गांधी ने अपने पत्र में राज्यपाल के संवैधानिक पद और उस पद पर रहते हुए आपराधिक कार्यवाही से मिलने वाले संरक्षण का भी उल्लेख किया है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो संवैधानिक पद पर नियुक्ति के कारण जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े सवाल जटिल हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना

राहुल गांधी ने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दुष्यंत गौतम की नियुक्ति की सलाह देकर प्रधानमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा के प्रति अपनी चिंता पर सवाल खड़े किए हैं।

पत्र में राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को याद दिलाया कि राज्यपालों की नियुक्ति केंद्र सरकार की सलाह पर की जाती है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 74(1) का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति से सरकार को नियुक्ति पर पुनर्विचार करने के लिए कहने का अनुरोध किया।

राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से मांग की कि दुष्यंत गौतम को CBI जांच पूरी होने तक राज्यपाल का पदभार नहीं संभालना चाहिए। उनका कहना है कि जांच पूरी होने से पहले नियुक्ति को लेकर उठे सवालों का समाधान होना चाहिए, ताकि संवैधानिक पद की गरिमा और जनता का भरोसा कायम रह सके।

अंकिता के माता-पिता के लिए न्याय की मांग

पत्र के अंतिम हिस्से में राहुल गांधी ने अंकिता के माता-पिता का उल्लेख किया, जो अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें और परिवार की पीड़ा को समझते हुए नियुक्ति पर पुनर्विचार की पहल करें।

अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन VIP की पहचान और उससे जुड़े सवालों को लेकर राजनीतिक तथा सार्वजनिक बहस जारी है। CBI जांच के निष्कर्ष इस विवाद से जुड़े शेष सवालों के जवाब देने में महत्वपूर्ण होंगे।

राहुल गांधी की राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी ने अंकिता भंडारी मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राष्ट्रपति कार्यालय और केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं तथा CBI जांच में आगे क्या सामने आता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *