एबीसी नेशनल न्यूज | 25 जनवरी 2026
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुजरात में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक काम नहीं है, बल्कि पूरी तरह सुनियोजित तरीके से की जा रही वोट चोरी है। राहुल गांधी के मुताबिक, गुजरात में SIR के नाम पर जो कुछ हो रहा है, वह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। राहुल गांधी ने दावा किया कि एक ही व्यक्ति के नाम से हजारों आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। खास तौर पर कांग्रेस समर्थक बूथों और कुछ चुनिंदा वर्गों के वोट जानबूझकर काटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां बीजेपी को हार का अंदेशा होता है, वहां मतदाताओं के नाम सिस्टम से गायब कर दिए जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यही तरीका पहले असम और राजस्थान में अपनाया गया था और अब वही पैटर्न गुजरात, राजस्थान और दूसरे राज्यों में लागू किया जा रहा है, जहां SIR लागू किया गया है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि SIR को “एक व्यक्ति, एक वोट” के संवैधानिक अधिकार को खत्म करने का हथियार बना दिया गया है, ताकि जनता नहीं बल्कि बीजेपी तय करे कि सत्ता में कौन रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सबसे दुखद बात यह है कि चुनाव आयोग अब लोकतंत्र का रक्षक नहीं रहा, बल्कि इस कथित वोट चोरी की साजिश का हिस्सा बन चुका है।
उधर, गुजरात कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। गुजरात कांग्रेस के मुताबिक, नियमों के अनुसार SIR के बाद ड्राफ्ट लिस्ट जारी होनी चाहिए थी और 18 जनवरी तक आपत्तियां ली जानी थीं। लेकिन इसके बाद अचानक लाखों आपत्तियां (फॉर्म-7) जमा कर दी गईं।
गुजरात कांग्रेस का आरोप है कि करीब 12 लाख आपत्तियों में कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम से दर्जनों आपत्तियां डाली गईं। कई जगह नाम किसी का था और हस्ताक्षर किसी और के, फिर भी चुनाव आयोग मूकदर्शक बना रहा।
कांग्रेस का कहना है कि जब विपक्षी दल लिखित में इन आपत्तियों की जानकारी मांगते हैं, तो चुनाव आयोग कोई जवाब नहीं देता। इससे साफ होता है कि पूरी प्रक्रिया में न पारदर्शिता है और न ही जवाबदेही।
गुजरात कांग्रेस ने कहा कि चुनाव आयोग चाहे अपनी जिम्मेदारी से भागे, लेकिन कांग्रेस भारत के लोकतंत्र और जनता के वोट के अधिकार से खिलवाड़ नहीं होने देगी। “एक व्यक्ति, एक वोट” के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी और तब तक शांत नहीं बैठेगी, जब तक हर नागरिक का वोट सुरक्षित नहीं हो जाता। इस मामले ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतंत्र की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




