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छात्राओं से संवाद में राहुल गांधी ने उठाए बड़े मुद्दे—महिलाओं की भागीदारी, जातीय जनगणना से मणिपुर हिंसा तक खुलकर चर्चा

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राष्ट्रीय / एजुकेशन/ महिला | मौबनी मजूमदार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 26 अप्रैल 2026

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में छात्राओं के साथ हुए संवाद को केवल एक औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे देश के अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा का मंच बना दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय और गार्गी कॉलेज की छात्राओं के साथ बातचीत के दौरान महिला आरक्षण, महिलाओं की भागीदारी, जातीय जनगणना, मणिपुर में हिंसा और उसके समाधान जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम का माहौल खुला और संवादात्मक रहा, जहां छात्राओं ने बेझिझक अपने सवाल रखे और राहुल गांधी ने हर मुद्दे पर विस्तार से जवाब दिया।

महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में एक जरूरी कदम है। उन्होंने कहा कि जब तक नीति निर्माण में महिलाओं की मजबूत और प्रभावी हिस्सेदारी नहीं होगी, तब तक उनके वास्तविक मुद्दों का समाधान अधूरा ही रहेगा। छात्राओं ने भी इस विषय पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा कि उन्हें केवल प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति चाहिए, ताकि बदलाव जमीन पर नजर आ सके।

जातीय जनगणना के मुद्दे पर भी चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने इसे सामाजिक संतुलन और नीति निर्धारण के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि सही आंकड़ों के बिना न तो योजनाएं सही बन सकती हैं और न ही समाज के सभी वर्गों को न्याय मिल सकता है। इस विषय पर छात्राओं ने भी सवाल किए और सामाजिक समानता के लिए पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।

बातचीत के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और अवसरों का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आज भी कई क्षेत्रों में उन्हें बराबरी का मौका नहीं मिलता। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि देश के विकास के लिए जरूरी है कि महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, राजनीति और नेतृत्व के हर स्तर पर समान अवसर दिए जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आधी आबादी को पीछे रखकर कोई भी देश आगे नहीं बढ़ सकता।

संवाद का एक अहम हिस्सा मणिपुर में जारी हिंसा और उसके समाधान पर केंद्रित रहा। राहुल गांधी ने इस विषय को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसे हालात में सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि शांति स्थापित करने के लिए संवाद, भरोसा और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। छात्राओं ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए समाधान के रास्तों पर सवाल किए, जिस पर राहुल गांधी ने कहा कि हिंसा का अंत केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति और आपसी विश्वास से ही संभव है।

पूरे कार्यक्रम के दौरान यह साफ नजर आया कि छात्राएं न केवल अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हैं, बल्कि देश के बड़े और जटिल मुद्दों पर भी गहरी समझ रखती हैं। राहुल गांधी ने उनकी इस जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि देश का भविष्य सुरक्षित हाथों में है, क्योंकि आज की युवा पीढ़ी सवाल पूछ रही है और बदलाव के लिए तैयार है। यह संवाद केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाले भारत की सोच और दिशा को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बन गया।

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