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राहुल गांधी ने युवाओं के साहस को सराहा, मोदी सरकार पर साधा निशाना

राहुल गांधी ने NEET और पेपर लीक के मुद्दे पर प्रदर्शन करने वाले युवाओं की तारीफ करते हुए पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्राओं को दुर्व्यवहार, गाली-गलौज और हिंसा का सामना करना पड़ा और युवाओं के विरोध को दबाने की कोशिश की गई।

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 अगस्त 2026

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं ने जिस साहस के साथ सरकार के खिलाफ आवाज उठाई है, वह प्रशंसनीय है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो के साथ राहुल गांधी ने खास तौर पर उन छात्राओं का उल्लेख किया, जिन्होंने पिछले महीने NEET और कथित पेपर लीक के मुद्दे पर प्रदर्शन किया था। राहुल ने आरोप लगाया कि इन युवाओं को प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती का सामना करना पड़ा और लड़कियों के साथ “दुर्व्यवहार, मौखिक दुर्व्यवहार और हिंसा” की गई।

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को “हिंसक शासन” बताते हुए युवाओं के प्रतिरोध को सराहा। उनके द्वारा साझा किए गए वीडियो में वह उन छात्रों के साथ बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं, जिन्होंने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर हुआ था और 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई के बाद यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक रूप से गरमा गया था।

राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब परीक्षा प्रणाली, युवाओं के रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। पिछले कुछ समय से NEET सहित विभिन्न परीक्षाओं को लेकर छात्रों के बीच असंतोष सामने आया है। विपक्ष का आरोप रहा है कि पेपर लीक, परीक्षा में देरी और प्रशासनिक खामियों का सबसे बड़ा नुकसान उन युवाओं को उठाना पड़ता है, जो वर्षों की मेहनत और आर्थिक संसाधन लगाकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

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राहुल गांधी ने अपने वीडियो के जरिए प्रदर्शनकारी युवाओं को केवल परीक्षा से जुड़ा मुद्दा उठाने वाला समूह नहीं, बल्कि सरकार से जवाब मांगने वाली नई पीढ़ी के प्रतिनिधि के तौर पर पेश करने की कोशिश की। उन्होंने युवाओं के साहस को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने दबाव के बावजूद अपनी आवाज उठाई। उनके बयान का राजनीतिक संदेश साफ है—कांग्रेस युवाओं, परीक्षा व्यवस्था और रोजगार से जुड़े मुद्दों को सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाना चाहती है।

हालांकि, राहुल गांधी के आरोपों पर सरकार या भाजपा की ओर से इस बयान के संदर्भ में कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़े आरोपों को उनके राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जब तक संबंधित घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि या आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने न आएं।

राहुल गांधी का यह हमला उस समय भी महत्वपूर्ण है जब कांग्रेस सहित विपक्षी दल संसद में युवाओं, शिक्षा, परीक्षा प्रणाली और कथित पेपर लीक जैसे मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार और अनियमितताओं पर कार्रवाई का दावा करती रही है। ऐसे में युवाओं से जुड़े मुद्दे आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव का एक बड़ा केंद्र बन सकते हैं।

राहुल गांधी के बयान ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के अधिकारों को लेकर सरकार की जवाबदेही कितनी प्रभावी है। NEET और अन्य परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने पहले ही लाखों अभ्यर्थियों के बीच भरोसे का सवाल खड़ा किया है। अब विपक्ष इस असंतोष को राजनीतिक आवाज देने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार के सामने चुनौती केवल परीक्षा आयोजित करने की नहीं, बल्कि युवाओं का भरोसा दोबारा कायम करने की भी है।

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