एबीसी नेशनल न्यूज | 6 फरवरी 2026
राहुल गांधी आमतौर पर कांग्रेस नेताओं के सालाना लंच या सामाजिक आयोजनों में बहुत कम ही नज़र आते हैं। पार्टी के अधिकांश नेता अपने-अपने कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित ज़रूर करते हैं, लेकिन यह भी सब जानते हैं कि ऐसे निमंत्रण स्वीकार करना उनके लिए अपवाद की तरह होता है। यही वजह है कि जब राहुल गांधी किसी लंच में पहुंचते हैं, तो वह आयोजन सिर्फ़ औपचारिक भोज नहीं रह जाता, बल्कि सियासी संकेतों और आपसी रिश्तों की नब्ज़ टटोलने का मौका बन जाता है।
हरियाणा कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाए जाने के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राहुल गांधी के रिश्तों में साफ़ तौर पर गर्मजोशी बढ़ी है। इस लंच में राहुल गांधी की मौजूदगी को इसी बदले हुए समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व और राज्य इकाई के बीच संवाद अब पहले से अधिक सहज और भरोसेमंद हुआ है, जिसका असर संगठनात्मक फैसलों में भी दिखाई देने लगा है।
सिर्फ़ भूपेंद्र हुड्डा ही नहीं, उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा ने भी हाल के वर्षों में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा—दोनों से अपनी नज़दीकियां काफ़ी बढ़ाई हैं। इस लंच में प्रियंका गांधी की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राजनीतिक तौर पर और अहम बना दिया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नई पीढ़ी के नेतृत्व और शीर्ष नेतृत्व के बीच यह संवाद आने वाले समय की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है।
कांग्रेस के भीतर ऐसे लंच सिर्फ़ खाने-खिलाने तक सीमित नहीं होते। ये आपसी मिलने-जुलने, पुराने गिले-शिकवे दूर करने और अनौपचारिक बातचीत के मंच होते हैं। पत्रकारों के लिए यह मौके अक्सर “ऑफ द रिकॉर्ड” सूचनाओं के होते हैं, जबकि नेताओं के लिए यह आपसी समीकरण सुधारने और संदेश देने का ज़रिया बनते हैं। हरियाणा कांग्रेस के इस लंच में भी माहौल औपचारिक से ज़्यादा अनौपचारिक और संवादपूर्ण रहा।
पार्टी के वरिष्ठ पत्रकारों को याद है कि राहुल गांधी पहली बार ऐसे किसी लंच में लगभग 20 साल पहले शामिल हुए थे, जब वीरप्पा मोइली कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन थे। उसके बाद राहुल गांधी बहुत गिने-चुने ऐसे आयोजनों में ही दिखाई दिए। यही कारण है कि हर बार उनकी मौजूदगी को पार्टी और सियासी हलकों में एक संदेश के तौर पर पढ़ा जाता है।
इस लंच की एक दिलचस्प और चर्चा में रही बात यह भी रही कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने खुद स्टॉल पर जाकर खाना लिया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह उनकी सहज और ज़मीनी शैली का हिस्सा है। दिलचस्प यह है कि पार्टी में कई छोटे-छोटे नेता भी ऐसे मौक़ों पर टेबल पर बैठकर सर्विस करवाना पसंद करते हैं, जबकि शीर्ष नेतृत्व का यह व्यवहार कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच एक अलग संदेश देता है।
इस आयोजन में कांग्रेस के ज़्यादातर वरिष्ठ नेता मौजूद थे, साथ ही सहयोगी दलों के भी कई नेता पहुंचे। हरियाणा के सामाजिक जीवन से जुड़े लोग भी बड़ी संख्या में इस लंच में शामिल हुए। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम एक साधारण राजनीतिक भोज से कहीं ज़्यादा—हरियाणा की राजनीति, कांग्रेस के आंतरिक रिश्तों और आने वाले सियासी संकेतों का अहम पड़ाव बनकर सामने आया।




