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पटना हॉस्टल रेप-हत्या मामला: सरकार के रवैये पर प्रियंका गांधी का तीखा हमला, जांच से लेकर कार्रवाई तक उठाए सवाल

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली/पटना | 7 फरवरी 2026

NEET की तैयारी कर रही छात्रा से जुड़ा गंभीर मामला

पटना के एक हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा के साथ रेप और हत्या का मामला सामने आने के बाद बिहार ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। घटना ने महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि यह सिर्फ़ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की असंवेदनशीलता और राजनीतिक संरक्षण का मामला बनता जा रहा है।

प्रियंका गांधी का सीधा आरोप: “सब कुछ संदिग्ध बनाया जा रहा है”

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया के ज़रिये सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि FIR दर्ज होने से लेकर जांच और कार्रवाई तक—हर क़दम को संदिग्ध बना दिया गया है। प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि आखिर यह सब किसे बचाने के लिए किया जा रहा है और क्यों प्रशासन पीड़िता के बजाय व्यवस्था की रक्षा में जुटा दिख रहा है।

महिलाओं के खिलाफ अपराधों का पैटर्न बताया

प्रियंका गांधी ने कहा कि हाथरस, उन्नाव, अंकिता भंडारी और अब पटना—जहां-जहां महिलाओं के साथ जघन्य अपराध हुए, वहां बीजेपी की सरकारें पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय आरोपियों के साथ खड़ी नजर आईं। उनके अनुसार यह अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सत्ता के रवैये का एक खतरनाक पैटर्न है।

पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर भी सवाल

इस मामले में आवाज़ उठा रहे पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को भी प्रियंका गांधी ने सरकार की असंवेदनशीलता से जोड़ा। उनका कहना है कि जो नेता पीड़िता के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं, उन्हें ही दबाने की कोशिश की जा रही है—जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

बीजेपी पर गंभीर राजनीतिक आरोप

प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी और उसके सहयोगियों का एजेंडा साफ है—वे अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़े होने के बजाय सत्ता और प्रभावशाली लोगों के हितों की रक्षा कर रहे हैं। महिलाओं के साथ अपराध होने पर संवेदनशीलता दिखाने के बजाय सरकार रक्षात्मक मुद्रा अपनाती है।

जांच और न्याय पर उठते सवाल

विपक्षी दलों और महिला अधिकार संगठनों का कहना है कि इस प्रकरण में निष्पक्ष, तेज़ और पारदर्शी जांच की जगह भ्रम और संदेह का माहौल बनाया जा रहा है। FIR की प्रक्रिया, जांच की दिशा और राजनीतिक कार्रवाइयों ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

बढ़ता राजनीतिक और सामाजिक दबाव

पटना हॉस्टल मामला अब केवल एक केस नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक नैतिकता की कसौटी बन चुका है। विपक्ष ने संकेत दिया है कि यदि जल्द और स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और तेज़ी से उठेगा।

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