राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | प्रयागराज | 20 अप्रैल 2026
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi से जुड़े कथित ड्यूल सिटिजनशिप मामले में तीन दिनों के भीतर तेजी से घटनाक्रम बदला है। Allahabad High Court में चल रही सुनवाई ने अब एक नया मोड़ ले लिया है, जिससे यह मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। घटनाक्रम की शुरुआत 17 अप्रैल को हुई, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत के इस आदेश के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई और मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
इसके अगले ही दिन 18 अप्रैल को स्थिति बदल गई। उसी हाईकोर्ट ने अपने ही आदेश पर रोक लगा दी और एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश को फिलहाल स्थगित कर दिया। अदालत के इस फैसले से तत्काल राहत की स्थिति बनी और यह संकेत मिला कि मामले पर आगे विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है।
इसी बीच 20 अप्रैल को इस केस में एक और अहम मोड़ आया, जब सुनवाई कर रहे जज ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया। न्यायाधीश के इस फैसले को कानूनी भाषा में “रिक्यूज़” कहा जाता है, जिसका मतलब होता है कि जज किसी कारणवश मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लेते हैं। हालांकि, जज द्वारा अलग होने के कारणों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।
तीन दिनों में आए इन लगातार फैसलों ने इस मामले को और जटिल बना दिया है। एक तरफ एफआईआर के आदेश और फिर उस पर रोक, और अब जज का खुद को अलग कर लेना—इन सबने यह संकेत दिया है कि मामला संवेदनशील और कानूनी तौर पर पेचीदा है।
कांग्रेस की ओर से अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर औपचारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है, लेकिन पार्टी के नेताओं ने इसे “राजनीतिक रूप से प्रेरित” मामला बताया है। वहीं, विपक्षी दल इस मामले को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
अब यह मामला नए जज के पास जाएगा, जहां आगे की सुनवाई तय होगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह केस और महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है, क्योंकि इसमें संवैधानिक और नागरिकता से जुड़े गंभीर प्रश्न शामिल हैं।




