Home » International » परमाणु ताकत बढ़ाने की दौड़ तेज: भारत के पास अब 190 परमाणु हथियार, चीन और पाकिस्तान से तुलना ने बढ़ाई चिंता

परमाणु ताकत बढ़ाने की दौड़ तेज: भारत के पास अब 190 परमाणु हथियार, चीन और पाकिस्तान से तुलना ने बढ़ाई चिंता

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 10 जून 2026

दुनिया में परमाणु हथियारों की होड़ लगातार तेज होती जा रही है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की नई रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पिछले एक वर्ष में अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाकर 190 कर ली है। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले 10 अधिक है। रिपोर्ट से साफ संकेत मिलता है कि एशिया में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और भारत, चीन तथा पाकिस्तान अपने-अपने सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में जुटे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार रूस और अमेरिका अभी भी दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्तियां बने हुए हैं। रूस के पास लगभग 4,400 और अमेरिका के पास 3,700 परमाणु हथियार हैं। हालांकि इन दोनों देशों के भंडार में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन एशिया में परमाणु क्षमता के विस्तार की रफ्तार अधिक दिखाई दे रही है। विशेष रूप से चीन ने एक साल में 20 नए परमाणु हथियार जोड़कर अपनी कुल संख्या 620 तक पहुंचा दी है, जो उसे क्षेत्र की सबसे तेजी से बढ़ती परमाणु शक्ति बनाती है।

भारत के पड़ोसी पाकिस्तान के पास फिलहाल 170 परमाणु हथियार बताए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के परमाणु भंडार में पिछले वर्ष कोई वृद्धि नहीं हुई। इसके बावजूद दक्षिण एशिया में भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच सामरिक संतुलन और सुरक्षा चिंताएं लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। वहीं उत्तर कोरिया ने भी अपने भंडार में 10 नए हथियार जोड़कर कुल संख्या 60 कर ली है।

रिपोर्ट केवल हथियारों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन परमाणु ढांचों और सुविधाओं पर भी प्रकाश डालती है जो किसी देश की दीर्घकालिक परमाणु क्षमता को मजबूत बनाती हैं। भारत के कलपक्कम, तारापुर और ट्रॉम्बे जैसे परमाणु केंद्र देश की रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान के कहूटा और चश्मा जैसे केंद्र उसकी परमाणु नीति की रीढ़ माने जाते हैं। चीन ने भी यूरेनियम संवर्धन और पुनर्प्रसंस्करण के लिए बड़े पैमाने पर आधारभूत ढांचा विकसित किया है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन, भारत और पाकिस्तान तीनों देशों की परमाणु रणनीति में भूमि आधारित मिसाइलों की सबसे बड़ी भूमिका है। चीन के पास 509 भूमि आधारित परमाणु वारहेड हैं, जबकि भारत के पास 104 और पाकिस्तान के पास 126 हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि चीन इस क्षेत्र में अपने दोनों पड़ोसियों से काफी आगे निकल चुका है।

समुद्र आधारित परमाणु क्षमता के मामले में भी चीन सबसे आगे है। चीन के पास पनडुब्बियों से लॉन्च किए जाने वाले 72 परमाणु वारहेड हैं, जबकि भारत के पास 12 हैं। पाकिस्तान के पास अभी ऐसी कोई परिचालन क्षमता नहीं बताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र आधारित परमाणु शक्ति किसी भी देश को “सेकेंड स्ट्राइक क्षमता” देती है, जो परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

हवाई मार्ग से परमाणु हथियार पहुंचाने की क्षमता भी तीनों देशों के पास मौजूद है। भारत के पास 48, पाकिस्तान के पास 36 और चीन के पास 20 एयर-डिलीवर्ड परमाणु हथियार बताए गए हैं। यह दर्शाता है कि तीनों देश परमाणु हथियारों को अलग-अलग माध्यमों से तैनात करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियारों की संख्या में यह बढ़ोतरी केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल का भी संकेत है। चीन के तेजी से विस्तार, भारत की बढ़ती क्षमता और पाकिस्तान की सतत तैयारी से दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे संवेदनशील परमाणु क्षेत्रों में से एक बना हुआ है।

SIPRI की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब दुनिया पहले से ही कई भू-राजनीतिक तनावों, युद्धों और क्षेत्रीय संघर्षों का सामना कर रही है। ऐसे में परमाणु हथियारों की बढ़ती संख्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में हथियारों की नई दौड़ को रोकने और रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए वैश्विक स्तर पर संवाद और विश्वास निर्माण के प्रयासों को और मजबूत करने की जरूरत होगी।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted