अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/बीजिंग | 10 जून 2026
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने चीन की कई बड़ी कंपनियों को उन कंपनियों की सूची में शामिल कर दिया है, जिनके चीन की सेना से कथित संबंध होने का संदेह है। इस सूची में दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी BYD, ई-कॉमर्स दिग्गज Alibaba, टेक्नोलॉजी कंपनी Baidu, इलेक्ट्रिक कार निर्माता Nio और विमान निर्माता Comac जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।
अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि इस सूची का उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों और संस्थानों को संभावित सुरक्षा जोखिमों के प्रति सतर्क करना है। हालांकि इन कंपनियों पर तत्काल कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन सूची में शामिल होने से उनकी वैश्विक छवि और भविष्य के व्यावसायिक अवसरों पर असर पड़ सकता है।
पेंटागन ने कुल 188 चीनी कंपनियों को “चीनी सैन्य कंपनियों” की श्रेणी में रखा है। अमेरिका का आरोप है कि ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीन की सैन्य और रणनीतिक गतिविधियों से जुड़ी हो सकती हैं। इनमें से कई कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बैटरी निर्माण, ड्रोन तकनीक और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में दुनिया की अग्रणी कंपनियों में शामिल हैं।
इस फैसले पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका में चीनी दूतावास ने इस कदम को “भेदभावपूर्ण” बताते हुए कहा कि चीनी कंपनियां विदेशों में काम करते समय स्थानीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करती हैं। चीन का आरोप है कि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर चीनी कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा से बाहर करने की कोशिश कर रहा है।
Alibaba ने भी अमेरिकी फैसले का विरोध किया है। कंपनी ने कहा है कि उसका चीन की सेना से कोई संबंध नहीं है और उसे इस सूची में शामिल करने का कोई आधार नहीं है। कंपनी ने संकेत दिया है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए कानूनी कदम उठा सकती है। Baidu ने भी कहा कि उसे सूची में शामिल करने के पीछे कोई ठोस कारण नहीं है और वह अपना नाम हटवाने के लिए उपलब्ध सभी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम केवल सुरक्षा से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा भी है। खासतौर पर इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला लगातार तेज होता जा रहा है।
BYD का नाम इस सूची में शामिल होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में BYD ने अमेरिकी कंपनी Tesla को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी का स्थान हासिल किया है। हालांकि BYD अपने वाहन अमेरिका में नहीं बेचती, फिर भी उसकी बढ़ती वैश्विक ताकत अमेरिका के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजिंग इस कदम को आर्थिक दबाव और चीन को रोकने की रणनीति के रूप में देख सकता है। इसके जवाब में चीन भी अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है या अपनी ओर से नई प्रतिबंध सूची जारी कर सकता है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक तनाव और बढ़ने की आशंका है।
फिलहाल यह सूची केवल चेतावनी और निगरानी के उद्देश्य से जारी की गई है, लेकिन इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका इन कंपनियों पर और कड़े कदम उठाता है या नहीं, और चीन इसका क्या जवाब देता है। दुनिया की अर्थव्यवस्था और तकनीकी उद्योग पर इस टकराव का असर आने वाले वर्षों में और अधिक दिखाई दे सकता है।




