एबीसी डेस्क 22 दिसंबर 2025
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की एक और भर्ती ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लेखपाल भर्ती के बाद अब स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी (HEO) के पदों में भी OBC और SC वर्ग के साथ कथित अन्याय का आरोप लग रहा है। आयोग ने HEO के कुल 221 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है, लेकिन इसमें आरक्षण का गणित देखकर पिछड़े और दलित वर्ग के लोग हैरान हैं।

जारी विज्ञापन के मुताबिक 221 पदों में सामान्य वर्ग (UR) के लिए 143 पद रखे गए हैं। वहीं OBC वर्ग को सिर्फ 20 पद दिए गए हैं, जो कुल पदों का लगभग 9 प्रतिशत ही बनता है। जबकि नियमों के अनुसार OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए, यानी करीब 60 पद। इस हिसाब से OBC वर्ग के करीब 40 पद कम कर दिए गए हैं।
इसी तरह दलित यानी SC वर्ग के लिए 21 पद तय किए गए हैं। जबकि 221 पदों में 21 प्रतिशत के हिसाब से SC को करीब 47 पद मिलने चाहिए थे। यानी यहां भी लगभग 26 पद कम दिखाई दे रहे हैं। दूसरी ओर EWS वर्ग को 10 प्रतिशत के अनुसार 22 पद दिए गए हैं, जो तय मानक के अनुरूप हैं।
पूरा वर्गवार बंटवारा इस प्रकार है—
UR: 143
OBC: 20
EWS: 22
SC: 21
ST: 15
इस बंटवारे को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों को उनके संवैधानिक हक से बार-बार क्यों वंचित किया जा रहा है। सामाजिक संगठनों और अभ्यर्थियों का कहना है कि यह सिर्फ आंकड़ों की गलती नहीं, बल्कि एक सोची-समझी नीति का हिस्सा लगती है, जिसमें बहुजन वर्ग के हिस्से के पद घटाए जा रहे हैं।
आलोचकों का आरोप है कि योगी सरकार के कार्यकाल में यह पहली बार नहीं है जब OBC और SC वर्ग के आरक्षित पदों में कटौती का मामला सामने आया हो। लेखपाल भर्ती के बाद अब HEO भर्ती में भी यही तस्वीर उभरकर आई है। सवाल यह है कि अगर आरक्षण का नियम कागज़ों पर है, तो जमीन पर उसका पालन क्यों नहीं हो रहा?
यह मामला सिर्फ एक भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस आदमी की उम्मीद से जुड़ा है, जो पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी के सपने देखता है। अब देखना यह होगा कि UPPSC और राज्य सरकार इन सवालों का क्या जवाब देती है और क्या बहुजन समाज को उसका पूरा हक मिल पाएगा या नहीं।





