अंतरराष्ट्रीय / आतंकवाद / सुरक्षा | ABC NATIONAL NEWS | लाहौर/नई दिल्ली | 22 मई 2026
साल 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के कथित मास्टरमाइंड और अल-बद्र आतंकी संगठन के कमांडर हमजा बुरहान उर्फ अर्जुमंद गुलजार डार की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा हत्या किए जाने की खबर ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सूत्रों के अनुसार हमजा बुरहान पर उस समय हमला किया गया जब वह पीओके में मौजूद था। हमले के पीछे किस संगठन या समूह का हाथ है, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने आतंकी नेटवर्क और पाकिस्तान में सक्रिय कट्टरपंथी ढांचे को लेकर कई सवाल फिर खड़े कर दिए हैं।
हमजा बुरहान को भारत ने अप्रैल 2022 में आतंकवादी घोषित किया था। उस पर जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह पुलवामा हमले की साजिश से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल माना जाता था। फरवरी 2019 में हुए पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 से अधिक जवान शहीद हुए थे, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों में भारी तनाव पैदा हो गया था और बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसी बड़ी सैन्य कार्रवाई देखने को मिली थी।
इस घटना के बाद एक बार फिर पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय आतंकी संगठनों और उनके सुरक्षित ठिकानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो सकती है। भारत लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाता है। पीओके में सक्रिय आतंकी ढांचे को लेकर भारत कई बार संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मंचों पर चिंता जता चुका है। अब हमजा बुरहान की हत्या ने यह संकेत भी दिया है कि आतंकी संगठनों के भीतर अंदरूनी संघर्ष, प्रतिद्वंद्विता और खुफिया गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और पीओके में कई कट्टरपंथी और आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोगों पर रहस्यमयी हमले हुए हैं। इनमें से कई मामलों में अज्ञात हमलावरों द्वारा गोलीबारी की घटनाएं सामने आईं, लेकिन अधिकतर मामलों में जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। इससे यह धारणा भी मजबूत हुई है कि आतंकी नेटवर्क के भीतर विश्वास का संकट और सत्ता संघर्ष गहराता जा रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हमजा बुरहान की मौत केवल एक आतंकी कमांडर की हत्या नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की जटिल सुरक्षा राजनीति का हिस्सा भी मानी जाएगी। पुलवामा हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को और अधिक आक्रामक बनाया था। सीमा पार आतंकी ढांचे पर लगातार दबाव और अंतरराष्ट्रीय निगरानी के कारण कई संगठनों की गतिविधियों पर असर पड़ा है। ऐसे माहौल में किसी बड़े आतंकी चेहरे की हत्या क्षेत्रीय आतंकी नेटवर्क के भीतर अस्थिरता का संकेत मानी जा रही है।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस खबर पर नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस घटना को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पुलवामा हमले से जुड़ा एक बड़ा नाम अब खत्म हो चुका है, लेकिन सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा का संकट अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।




