अंतरराष्ट्रीय डेस्क 9 जनवरी 2026
ईरान में गहराते आर्थिक संकट और देशभर में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन का एक बयान देश-दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। राष्ट्रपति ने मौजूदा हालात की ज़िम्मेदारी सीधे अपने ऊपर लेते हुए कहा है कि इन परिस्थितियों के लिए न तो आम लोग, न कर्मचारी और न ही छात्र दोषी हैं, बल्कि दोषी वह स्वयं और सरकार है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान दिसंबर 2025 के अंत से अब तक अपने सबसे बड़े जनआंदोलनों में से एक का सामना कर रहा है। एक सरकारी बैठक के दौरान दिए गए अपने बयान में राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने साफ शब्दों में कहा, “मौजूदा हालात के लिए लोग, कर्मचारी या स्टूडेंट्स ज़िम्मेदार नहीं हैं; दोषी मैं हूँ, हम हैं। हमें अपने कामों को सुधारने की ज़रूरत है।” यह बयान उन्होंने जनवरी 2026 की शुरुआत में आयोजित राष्ट्रीय सरकारी अधिकारियों की बैठक (हमायेश-ए-सारासरी कारगुज़ाराने-ए-गुज़ीनिश) में दिया। ईरान की राजनीति में इस तरह का आत्मआलोचनात्मक और जिम्मेदारी स्वीकार करने वाला बयान असामान्य माना जा रहा है।
दरअसल, ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। बढ़ती महंगाई, ईरानी मुद्रा रियाल की लगातार गिरती कीमत, बेरोज़गारी और रोज़मर्रा की ज़रूरतों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी ने आम लोगों की ज़िंदगी मुश्किल कर दी है। इन्हीं कारणों से दिसंबर 2025 के अंत से देश के कई हिस्सों में आर्थिक असंतोष ने सड़कों का रुख किया, जो धीरे-धीरे राजनीतिक विरोध में बदल गया।
तेहरान, इस्फहान, यज़्द, मशहद और शिराज जैसे शहरों में हुए प्रदर्शनों के दौरान अब सिर्फ महंगाई ही नहीं, बल्कि सत्ता संरचना पर भी सवाल उठने लगे। कई जगहों पर “तानाशाह मुर्दाबाद”, “न गाज़ा, न लेबनान—मेरी जान ईरान के लिए” जैसे नारे सुनाई दिए, जिन्हें सीधे तौर पर सत्ता के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ माना गया। कुछ इलाकों में प्रदर्शन हिंसक भी हुए, जहां सुरक्षा बलों की कार्रवाई में दर्जनों लोगों की मौत और हज़ारों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आईं।
ऐसे माहौल में राष्ट्रपति पेज़ेशकियन का यह बयान सरकार की ओर से तनाव कम करने और संवाद का रास्ता खोलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने न सिर्फ ज़िम्मेदारी ली, बल्कि सुरक्षा बलों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख़्ती न बरतने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही, उन्होंने आर्थिक सुधारों, सब्सिडी प्रणाली में बदलाव और आम लोगों को राहत देने वाले कदमों का संकेत दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ईरान में असली सत्ता सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के पास होती है, और राष्ट्रपति की शक्तियाँ सीमित हैं। ऐसे में पेज़ेशकियन के बयान को एक नैतिक और राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, न कि त्वरित नीतिगत बदलाव की गारंटी के रूप में। इसके बावजूद, यह बयान ईरान के अंदर और बाहर यह संकेत देता है कि सरकार जनता के गुस्से को नज़र अंदाज़ नहीं कर सकती। सवाल अब यह है कि क्या यह आत्मस्वीकार सिर्फ बयान तक सीमित रहेगा, या फिर ज़मीन पर ऐसे सुधार देखने को मिलेंगे जो ईरान की जनता को वास्तविक राहत दे सकें। फिलहाल, यह बयान ईरान के मौजूदा संकट में एक अहम राजनीतिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।



