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नेपाल में गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं से हर साल सैकड़ों महिलाओं की मौत, आठ महीनों में 70 जानें गईं

अंतरराष्ट्रीय/स्वास्थ्य / नेपाल | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 5 मई 2026

आंकड़े बताते हैं गंभीर स्थिति

नेपाल में मातृ स्वास्थ्य की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। स्वास्थ्य सेवा विभाग के फैमिली वेलफेयर डिवीजन के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष के पहले आठ महीनों में 56 जिलों की 70 महिलाओं की मौत गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी जटिलताओं के कारण हो चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है, क्योंकि देश के सभी जिलों में मातृ मृत्यु निगरानी प्रणाली पूरी तरह लागू नहीं है।

जुमला की घटना ने फिर उठाए सवाल

हाल ही में जुमला जिले की 20 वर्षीय महिला की मौत ने इस गंभीर समस्या को फिर उजागर कर दिया। प्रसव के बाद उच्च रक्तचाप की शिकायत होने पर उसे कर्णाली एकेडमी ऑफ हेल्थ साइंसेज से एयरलिफ्ट कर सुर्खेत के प्रांतीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने किडनी और लिवर फेल होने की पुष्टि की। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। यह मामला दिखाता है कि समय पर उपचार और विशेषज्ञ सुविधा न मिलने से स्थिति कितनी तेजी से बिगड़ सकती है।

रिपोर्टिंग में कमी, असली संख्या अधिक होने की आशंका

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, मातृ एवं प्रसवकालीन मृत्यु निगरानी कार्यक्रम अभी केवल 77 में से 56 जिलों में ही लागू है। कई मामलों की रिपोर्टिंग नहीं हो पाती, जिससे मौतों का वास्तविक आंकड़ा सामने नहीं आ पाता। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस कार्यक्रम को और जिलों तक विस्तारित करने की योजना पर काम चल रहा है।

मुख्य कारण—रोकथाम संभव लेकिन लापरवाही भारी

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था कोई बीमारी नहीं है, लेकिन समय पर देखभाल न मिलने से यह जानलेवा बन जाती है। आंकड़ों के मुताबिक, उच्च रक्तचाप 18 प्रतिशत मौतों का कारण है, जबकि प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्टपार्टम हेमरेज) 13 प्रतिशत मामलों में जिम्मेदार है। इसके अलावा संक्रमण, अज्ञात कारण, एम्नियोटिक फ्लूड एम्बोलिज्म, गर्भपात संबंधी जटिलताएं और हृदय रोग भी प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि नियमित जांच, जोखिम की समय पर पहचान और उचित केंद्रों पर रेफरल से अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और देरी बड़ी समस्या

मातृ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर इलाज न मिलना, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव इन मौतों की बड़ी वजह है। कई मामलों में मरीजों को सही समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा पाता, जिससे जटिलताएं बढ़ जाती हैं।

प्रगति के बावजूद चुनौती बरकरार

नेपाल ने पिछले दो दशकों में मातृ मृत्यु दर को काफी कम किया है। 1996 में जहां प्रति एक लाख जन्म पर 539 महिलाओं की मौत होती थी, वहीं 2016 तक यह आंकड़ा घटकर 239 हो गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्तमान में यह दर 142 प्रति एक लाख जीवित जन्म है। इसके बावजूद देश को 2030 तक इसे 75 तक लाने का लक्ष्य हासिल करना अभी भी बड़ी चुनौती है।

सरकार की योजनाएं, फिर भी जारी मौतें

सरकार ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, मुफ्त जांच और इलाज, प्रसव के लिए आर्थिक सहायता और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण जैसी कई योजनाएं लागू की हैं। इसके बावजूद हर साल सैकड़ों महिलाएं जान गंवा रही हैं, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी—हर मौत रोकी जा सकती है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मातृ मृत्यु रोकी जा सकती है, बशर्ते समय पर पहचान और इलाज हो। उनका मानना है कि स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने, ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं बढ़ाने और जागरूकता अभियान चलाने की तत्काल जरूरत है।

आंकड़ों से आगे इंसानी जिंदगी का सवाल

नेपाल में मातृ मृत्यु का मुद्दा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर परिवार की त्रासदी है। विशेषज्ञों का कहना है कि “हर जीवन महत्वपूर्ण है” और छोटी-छोटी पहल से कई जानें बचाई जा सकती हैं। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार और स्वास्थ्य संस्थाएं इस दिशा में कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाती हैं।

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